बेजुबान 'खुशी' की आखिरकार लौट आयी खुशी

Human Love Saves a Pet: Doctors Endoscopically Remove Earbud from Beagle Khushi in Kolkata
'खुशी' का किया गया बिना ऑपरेशन के इलाज
Published on

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : कहते हैं कि इंसान और पालतू जानवर का रिश्ता शब्दों का मोहताज नहीं होता, वह सिर्फ नि:स्वार्थ प्रेम की भाषा समझता है। कुछ ऐसा ही अनूठा पशु प्रेम और ममता का नजारा कोलकाता के बेहला में देखने को मिला, जहां सुपर्णा सिंहा राय की साढ़े तीन साल की लाडली मादा बीगल ‘खुशी’ ने अनजाने में वायरलेस हेडफोन का एक ईयरबड निगल लिया। इससे उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। अपनी मूक सहेली की जान आफत में देख सुपर्णा का दिल तड़प उठा। वे बिना वक्त गंवाए उसे लेकर तुरंत एनिमल हेल्थ पैथोलॉजी लैब (AHPL) की साउथ ब्रांच पहुंचीं। एक्स-रे में पेट के भीतर ईयरबड दिखने के बाद डॉक्टरों की अनुभवी टीम भी इस बेजुबान को नया जीवन देने की संवेदनशील कोशिश में जुट गई।

डॉक्टरों ने बिना सर्जरी बीगल के पेट से निकाला ईयरबड

खुशी को दर्द और चीर-फाड़ से बचाने के लिए डॉक्टरों ने ओपन सर्जरी के बजाय आधुनिक वीडियो एंडोस्कोपी तकनीक को चुना। बेहद सुरक्षित एनेस्थीसिया के बीच डॉक्टरों ने अत्यंत कुशलता और ममता भरे प्रयासों से बिना कोई कट लगाए पेट से ईयरबड को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय पर मिले इलाज और इंसान की संवेदनशीलता के कारण खुशी अब पूरी तरह स्वस्थ है। डॉक्टरों का कहना है कि ईयरबड जैसी इलेक्ट्रॉनिक चीजें जहरीली और घातक हो सकती हैं। यह सुपर्णा का अपनी पालतू के प्रति असीम लगाव ही था कि उन्होंने तुरंत स्थिति को भांपा। आज खुशी की सलामती ने यह साबित कर दिया कि जब इंसानियत और सही तकनीक हाथ मिलाते हैं, तो एक बेज़ुबान की जिंदगी में फिर से खुशियां लौट आती हैं।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in