

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने द्वीपसमूह की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्रशासन ने गृह मंत्रालय, भारत सरकार के परामर्श से उन द्वीपों और चट्टानों को आधिकारिक नाम देने की प्रक्रिया शुरू की है, जिन्हें अब तक कोई औपचारिक नाम प्राप्त नहीं था। साथ ही, ऐसे द्वीपों और चट्टानों के नामों का भी मानकीकरण किया जाएगा जिनके नाम समान हैं या भ्रम पैदा करते हैं। यह प्रक्रिया कुल 836 द्वीपों व चट्टानों में से 596 पर लागू की जा रही है, जिनके नामकरण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
सभी वर्गों से सुझाव आमंत्रित
अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने इस पहल को व्यापक बनाने के लिए आम जनता के साथ-साथ विभिन्न समूहों से भी सुझाव आमंत्रित किए हैं। इनमें जनजातीय समुदायों के सदस्य, पूर्व सैनिक, विद्यार्थी, शिक्षक, इतिहासकार, पर्यावरणविद् और शोधकर्ता शामिल हैं। प्रशासन का मानना है कि द्वीपों और चट्टानों के नाम केवल प्रशासनिक पहचान ही नहीं होते, बल्कि वे क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास, प्रकृति और जनजीवन को भी प्रतिबिंबित करते हैं। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को इसमें अपनी भागीदारी निभाने का अवसर दिया गया है।
इन विषयों पर आधारित हो सकते हैं नाम
निर्देशों के अनुसार, सुझाए गए नाम स्थानीय जनजातीय विरासत, स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रीय महापुरुषों, शहीदों, विशिष्ट वनस्पति एवं जीव-जंतुओं, भूगोलिक संरचनाओं, या ऐतिहासिक घटनाओं से प्रेरित हो सकते हैं। उद्देश्य यह है कि प्रत्येक द्वीप या चट्टान का नाम उसके पर्यावरण, स्थानिक महत्व और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाए। सुझाव देते समय यह भी कहा गया है कि प्रत्येक प्रस्ताव के साथ अधिकतम 200 शब्दों में नाम का औचित्य (justification) अवश्य जोड़ें। यह औचित्य बताएगा कि प्रस्तावित नाम क्यों उपयुक्त है और किस आधार पर रखा गया है।
15 दिनों के भीतर भेजें सुझाव
सुझाव इस सूचना के प्रकाशन की तिथि से 15 दिनों के भीतर भेजे जा सकते हैं। इच्छुक व्यक्ति अपने सुझाव तीन तरीकों से भेज सकते हैं—
व्यक्तिगत रूप से
ईमेल के माध्यम से (artand.culture@and.nic.in)
पंजीकृत डाक द्वारा ‘‘निदेशक, कला एवं संस्कृति विभाग, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन, सेल्युलर जेल परिसर, अटलांटा प्वाइंट-744101’’ पर भेज सकते हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नामकरण की यह प्रक्रिया द्वीपसमूह की भौगोलिक पहचान को मजबूत, ऐतिहासिक धरोहर को सम्मान और स्थानीय संस्कृति को संरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक व्यापक कदम है। इस पहल से न केवल द्वीपों की पहचान स्पष्ट होगी, बल्कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।