

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को वामपंथी दलों के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल जंतर-मंतर पहुंचा। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति एकजुटता जताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में इस पूरे घटनाक्रम पर बयान देने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में सीपीएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, ए. ए. रहीम, वी. सिवादासन, सीपीआई के राज्यसभा सांसद पी. संतोष कुमार और लोकसभा सांसद अमरा राम व एस. वेंकटेशन शामिल थे।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार शांतिपूर्ण आंदोलनों को बलपूर्वक दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ अभूतपूर्व बर्बरता हुई और राजधानी में ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ अन्य तत्व भी हिंसा में शामिल थे।
सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है, इसलिए गृह मंत्री अमित शाह को संसद में आकर पूरी घटना पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में 300 से अधिक छात्र घायल हुए हैं और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। वहीं पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, वाहनों में तोड़फोड़ की और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को घायल किया।
इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में चर्चा की मांग की। विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही लगातार दूसरे दिन भी कई बार बाधित हुई और अंततः दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।