

नई दिल्लीः ईरान पर अमेरिका के बड़े हमले का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका ने अपने दो युद्धपोत मध्य पूर्व में तैनात कर दिये हैं। बड़ी संख्या में फाइटर जेटों को भी तैयार रखा गया है। अमेरिका ने अपनी स्पेशल फोर्सेज को भी तैनात किया है। माना जा रहा है कि शनिवार को अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। ऐसे में ईरान ने अपनी कमर कस ली है।
ईरान ने अपनी चाल चलते हुए अपने मित्र राष्ट्र रूस के साथ सैन्य अभ्यास शुरू किया है। दोनों देशों की नौसेना ओमान की खाड़ी व उत्तरी हिंद महासागर में उतरीं और ज्वाइंट ड्रिल में हिस्सा ले रही हैं। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान की सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) और रूस की स्पेशल ऑपरेशन टीमों ने एक्सरसाइज के दौरान एक हाईजैक किए गए जहाज को छुड़ाने के लिए एक ऑपरेशन किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस ड्रिल में ईरान के अलवंद डिस्ट्रॉयर, मिसाइल लॉन्च करने वाले वॉरशिप, हेलीकॉप्टर, लैंडिंग क्राफ्ट, स्पेशल ऑपरेशन टीम और कॉम्बैट स्पीडबोट शामिल थे। यह एक्सरसाइज इस हफ्ते की शुरुआत में होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में आईआरजीसी की ड्रिल के बाद हुई, जिसमें रणनीतिक जलमार्ग को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था।
अमेरिका ईरान पर परमाणु हथियारों को बनाने से रोकने का दबाव डाल रहा है। हालांकि इस संबंध में दोनों राष्ट्रों के बीच ओमान की मध्यस्थता में बातचीत हो रही है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि ईरान के पास अपने परमाणु कार्यक्रम पर डील करने के लिए 10 से 15 दिन हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि इस समयसीमा से आगे बहुत बुरी चीजें होंगी। ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “मुझे लगता है कि यह काफी समय होगा।”
दो बड़े विमानवाहक पोतों की तैनाती
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने देश के विशाल विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को मिडिल ईस्ट में तैनात करने का आदेश दिया, जिससे इस इलाके में पहले से मौजूद यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर को और मजबूती मिलेगी। हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वायु और नौसैनिक शक्ति में बढ़ोतरी हुई है।
अमेरिकी मीडिया में कहा गया है कि अमेरिकी सेना इस हफ्ते तक ईरान पर हमला करने के लिए तैयार है। हफ्तों तक बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चल सकता है और इसे अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर चला सकता है। इस ऑपरेशन में ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को टारगेट किया जा सकता है। अमेरिका चाहता है कि ईरान से खोमैनी शासन अंत हो। पहले ही सरकार विरोधी आंदोलन में ईरान में हजारों लोग मारे जा चुके हैं जिसे लेकर ट्रंप ने इसे रोकने के लिए हमला करने तक की बात कही थी।