टोकन के नाम पर वसूली का आरोप, हावड़ा के दीघा बसस्टैंड में सिंडिकेट राज खत्म करने की मांग तेज

नई बस उतारने के लिए लाखों रुपये मांगने का दावा
टोकन के नाम पर वसूली का आरोप, हावड़ा के दीघा बसस्टैंड में सिंडिकेट राज खत्म करने की मांग तेज
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विरोध करने वालों को रूट और स्टैंड से रोकने के आरोप

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : हावड़ा स्टेशन के पास स्थित दीघा बसस्टैंड में लंबे समय से चल रहे कथित सिंडिकेट राज और अवैध वसूली के खिलाफ अब बस मालिक और कर्मचारी खुलकर सामने आने लगे हैं। उनका आरोप है कि वर्षों से टोकन और संगठन के नाम पर जबरन पैसे वसूले जा रहे थे। अब वे इस व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर पारदर्शी माहौल और निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रहे हैं।दीघा बसस्टैंड से हर दिन पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर के लिए लगभग 280 बसें रवाना होती हैं। बस मालिकों के एक वर्ग का आरोप है कि इंटर एंड इंट्रा रीजन बस एसोसिएशन के नाम पर रोजाना 50 रुपये के टोकन की जगह प्रति बस 250 से 300 रुपये तक वसूले जाते थे। इतना ही नहीं, किसी नई बस को रूट पर उतारने के लिए मालिकों से एकमुश्त दो से तीन लाख रुपये तक मांगे जाते थे।

परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि विरोध करने वालों को अलग-अलग तरीकों से परेशान किया जाता था। कभी बसों को रूट पर नहीं चलने दिया जाता, तो कभी ट्रिप खत्म होने के बाद बसस्टैंड में प्रवेश तक रोक दिया जाता था। आरोप यह भी है कि कई बसें बिना वैध परमिट और जरूरी कागजात के इस रूट पर चलाई जा रही थीं।

21 वर्षों से परिवहन व्यवसाय से जुड़े रूपक मान्ना ने आरोप लगाया कि सिंडिकेट के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें लगातार दबाव झेलना पड़ा और आखिरकार उन्हें अपनी बस बेचनी पड़ी। उनके मुताबिक, 50 रुपये की रसीद पर 130 रुपये तक वसूले जाते थे और रात में बस खड़ी करने के लिए अलग से पैसे देने पड़ते थे। उन्होंने दावा किया कि निगम के नाम पर पैसे तो लिए जाते थे, लेकिन वह राशि नगर निगम के खाते में जमा नहीं होती थी। उन्होंने 2016 में गोलाबाड़ी थाना में शिकायत भी दर्ज कराई थी, जिसके बाद लंबे समय तक उनकी बस को रूट पर चलने नहीं दिया गया।

बस मालिक अलोक दास ने आरोप लगाया कि परिवहन कर्मियों के लिए बने शौचालय के इस्तेमाल पर भी कर्मचारियों से पैसे लिए जाते थे। विरोध करने पर परेशान किया जाता था। वहीं बसकर्मी हारु चट्टोपाध्याय का कहना है कि आपत्ति जताने पर बसों को स्टैंड में घुसने नहीं दिया जाता था और उन्हें हावड़ा ब्रिज की ओर मोड़ दिया जाता था, जिससे अगली ट्रिप में देरी होती थी और पुलिस जुर्माने का सामना भी करना पड़ता था। अब राज्य की बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति के बीच बस मालिक और कर्मचारी इस कथित सिंडिकेट राज के अंत की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि परिवहन संगठन का चुनाव पारदर्शी तरीके से कराया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

राहुल चट्टोपाध्याय ने कहा कि दीघा बसस्टैंड लंबे समय से लगभग लावारिस स्थिति में था और प्रशासन के नाम पर लगातार सिंडिकेट चलाया जा रहा था। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।


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