सर्वदलीय बैठक में विधायी एजेंडा पर चर्चा, एनसीपीआई व शिवसेना (उबाठा) आमंत्रण पर विपक्ष का सांकेतिक वॉकआउट

एनसीपीआई व शिवसेना (उबाठा) गुटों को आमंत्रण पर विपक्ष का संयुक्त बहिर्गमन, लोकसभा अध्यक्ष के लंबित निर्णय का हवाला देकर सरकार पर नियमों की अनदेखी का आरोप
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सर्वदलीय बैठक
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नयी दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के आरंभ होने से एक दिन पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे और कुछ अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई, हालांकि तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) में बगावत से संबंधित मामलों को लेकर ‘‘संपूर्ण विपक्ष’’ ने बैठक से कुछ देर के लिए वाकआउट किया।

विपक्ष ने क्या कहा ?

विपक्ष का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों की बगावत के मामले में अंतिम निर्णय अभी लंबित है तो फिर इस गुट को नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के रूप में बैठक में आमंत्रित किया जाना उचित नहीं है। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, कांग्रेस नेता जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी और कोडिकुनिल सुरेश, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए। विपक्षी नेताओं ने बैठक से कुछ देर के लिए बहिर्गमन किया।

बहिर्गमन सांकेतिक विरोध

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘सभी विपक्षी दलों ने कुछ मिनटों के लिए सर्वदलीय बैठक से बहिर्गमन किया । यह मोदी सरकार द्वारा एनसीपीआई को बैठक के लिए आमंत्रित किए जाने का सांकेतिक विरोध था। एनसीपीआई को बैठक में बुलाने का फैसला उस वक्त किया गया जब लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अंतिम निर्णय अभी भी लंबित है।’’ शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सांवत ने कहा, ‘‘लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि छह सांसदों को “संबद्धता” प्रदान की गई है। कानून की पुस्तकों में यह शब्द कहां है? हमने इसका विरोध किया और बैठक से वॉकआउट किया।’’

लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकृति प्रदान की

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (उबाठा) के छह बागी सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी। साथ ही, एक कम चर्चित राजनीतिक दल ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में शामिल हुए तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के लिए लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था को भी स्वीकृति प्रदान की।

बैठक में इन विषयों को विपक्ष ने उठाया

सूत्रों का कहना है कि बैठक अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन, विदेश नीति, पेपर लीक और कुछ अन्य विषयों को विपक्ष द्वारा उठाया गया। समाजवादी पार्टी ने घोषणा की है कि वह राम मंदिर चढ़ावा मामले को संसद में पुरजोर तरीके से उठाएगी ।

ये विधेयक पेश किए जाएंगे

सरकार ने कुछ नए विधेयकों की घोषणा की है जिन्हें आगामी मानसून सत्र के दौरान लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जाएगा । लोकसभा सचिवालय के एक बुलेटिन के मुताबिक, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश करने, उस पर विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रावधान करता है। इसके माध्यम से सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाना चाहती है। इसके अलावा, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी पेश करने, विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु के विलंबित पंजीकरण से संबंधित प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाना है। सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेगी, जो सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को कर छूट देने के प्रावधान को औपचारिक रूप देने के लिए लाए गए अध्यादेश का स्थान लेने वाला विधेयक है।

सुदीप बंद्योपाध्याय भी बैठक में आमंत्रित

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए समूह के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय को भी इस सर्वदलीय बैठक के लिए आमंत्रित किया।

20 जुलाई से आरंभ होगा मानसून सत्र

मानसून सत्र 20 जुलाई से आरंभ होगा और इसके 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। संसद के प्रत्येक सत्र से पहले होने वाली इस बैठक में सरकार आमतौर पर अपने विधायी कार्यक्रम की जानकारी देती है और सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने में सहयोग का आग्रह करती है।

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