अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय विनियमन का किया विरोध

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय विनियमन का किया विरोध
Published on

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह ने प्रस्तावित "ड्राफ्ट अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह निजी विश्वविद्यालय विनियमन-2026" का कड़ा विरोध करते हुए द्वीपों के विद्यार्थियों के लिए एक समर्पित केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग की है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सचिव सत्यजीत हल्दर ने उपराज्यपाल को सौंपे गए एक ज्ञापन में कहा कि निजी विश्वविद्यालय द्वीपसमूह की लंबे समय से चली आ रही उच्च शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं का उचित समाधान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भौगोलिक अलगाव, आर्थिक परिस्थितियों तथा सीमित उच्च शिक्षा सुविधाओं को देखते हुए सरकार को पूर्णतः वित्तपोषित केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिससे द्वीपों के विद्यार्थियों को सस्ती, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने उच्च शिक्षा के संभावित व्यावसायीकरण, अत्यधिक शुल्क संरचना, शैक्षिक असमानता, अपर्याप्त छात्रवृत्ति व्यवस्था तथा वर्तमान सरकारी महाविद्यालयों के कमजोर पड़ने की आशंका पर भी चिंता व्यक्त की। संगठन ने यह भी कहा कि सार्वजनिक भूमि का उपयोग निजी शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा देने के बजाय सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में किया जाना चाहिए।

विद्यार्थी संगठन ने वर्तमान सात सरकारी महाविद्यालयों को बेहतर आधारभूत संरचना, आधुनिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल पुस्तकालयों, छात्रावासों, अनुसंधान सुविधाओं, शिक्षकों की नियुक्ति तथा कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से सुदृढ़ बनाने की मांग की। इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने समुद्री विज्ञान, मत्स्य पालन, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूलन, आपदा प्रबंधन, जनजातीय अध्ययन, पर्यटन तथा सतत द्वीप विकास जैसे विषयों पर विशेष उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा।

संगठन ने यह भी मांग की कि प्रस्तावित विधेयक पर अंतिम निर्णय लेने से पूर्व विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षा विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों तथा नागरिक समाज संगठनों के साथ व्यापक जनपरामर्श किया जाए। अपनी प्रमुख मांगों में एबीवीपी ने प्रशासन से प्रस्तावित डीम्ड विश्वविद्यालय तथा प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय विनियमन-2026 को तत्काल वापस लेने तथा भारत सरकार को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की सिफारिश करने का आग्रह किया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने द्वीपों के विद्यार्थियों के लिए सरकारी छात्रवृत्तियों, फेलोशिप, छात्रावास सुविधाओं एवं वित्तीय सहायता में वृद्धि करने के साथ-साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में योग्य स्थानीय युवाओं को अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भी मांग की।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सचिव सत्यजीत हल्दर ने कहा कि द्वीपसमूह के विद्यार्थी दशकों से एक विश्वस्तरीय सार्वजनिक विश्वविद्यालय की प्रतीक्षा कर रहे हैं तथा निजी या डीम्ड विश्वविद्यालय केंद्रीय विश्वविद्यालय की आवश्यकता का विकल्प नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि द्वीपों के युवाओं के दीर्घकालिक हितों के लिए सस्ती, समावेशी, उच्च गुणवत्ता वाली तथा अनुसंधान आधारित सार्वजनिक उच्च शिक्षा प्रणाली की स्थापना अत्यंत आवश्यक है।


Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in