

नयी दिल्ली : भारत ने रक्षा विमानन विनिर्माण (Defense Aviation Manufacturing) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मील का पत्थर पार कर लिया है। 'मेक इन इंडिया' अभियान को एक नई ऊंचाई देते हुए, गुजरात के वडोदरा स्थित टाटा-एयरबस संयंत्र में देश का पहला स्वदेशी रूप से असेंबल किया गया 'एयरबस सी-295' (Airbus C-295) सैन्य परिवहन विमान पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है। सैन्य विमानन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते भारत के कदमों के लिए यह एक बेहद क्रांतिकारी मोड़ है, क्योंकि यह विमान अब अपने अंतिम चरण यानी उड़ान परीक्षण (Flight Test) के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। इस ऐतिहासिक परियोजना की गंभीरता और प्रगति का प्रत्यक्ष जायजा लेने के लिए हाल ही में भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख, एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने वडोदरा के इस अत्याधुनिक संयंत्र का दौरा किया। उन्होंने वहां स्थापित फाइनल असेंबली लाइन का बारीकी से निरीक्षण किया।
एयरबस सी-295 भारतीय वायु सेना के पुराने एवरो-748 विमानों के बेड़े की जगह लेगा।
इस एयरबस का उपयोग आपदा राहत, पैराशूट जंपिंग , समुद्री निगरानी, रसद और हथियार पहुंचाने के लिए भी किया जाता है।
शानदार पेलोड के साथ यह विमान एक बार में 9,000 किलोग्राम तक का वजन ले जाने में पूरी तरह सक्षम है।
इस एयरबस में एक साथ 70 सैनिक या 48 पैराट्रूपर्स को ले जाया जा सकता है।
मेडिकल इमरजेंसी के दौरान इसमें एक बार में 24 स्ट्रेचर और 7 चिकित्साकर्मी फिट किए जा सकते हैं।
यह दो प्रैट एंड व्हिटनी PW127G टर्बोप्रॉप इंजनों से संचालित होता है और इसमें कम दूरी में टेक-ऑफ और लैंडिंग की क्षमता है
यह मात्र 670 मीटर के छोटे रनवे से टेक-ऑफ और 320 मीटर में लैंड कर सकता है।
यह एयरबस पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ एयरस्ट्रिप पर भी आसानी से लैंड कर सकता है।
एक बार ईंधन भरने के बाद यह लगातार 11 घंटे तक उड़ सकता है।
लगभग 5,000 किलोमीटर की अधिकतम दूरी तय करने में सक्षम है।
भारी रेंज और गतियह ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान 482 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से उड़ान भर सकता है।
बडोदरा संयंत्र का उद्घाटन 28 अक्टूबर, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने किया था। भारत ने स्पेन के साथ 56 सी-295 विमानों के लिए 21,935 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। समझौते के तहत, 16 विमान स्पेन से उड़ान भरने की स्थिति में भेजे जा रहे हैं, जबकि शेष 40 विमानों का निर्माण भारत में 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है।