भारत में पहली बार ट्रेन से अग्नि-प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण

स्पेशल ट्रेन बनायी, ऐसा परीक्षण करने वाला चौथा देश बना भारत
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चांदीपुर इंटिग्रेटेड टेस्ट रेंज से ‘अग्नि प्राइम मिसाइल’ का सफल परीक्षण
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नयी दिल्ली : भारत ने बुधवार की देर रात रेल पर बनी मोबाइल प्रक्षेपण प्रणाली से 2,000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली ‘अग्नि-प्राइम मिसाइल’ का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। देशभर में इस मिसाइल को तैनात करने की भारत की क्षमता प्रदर्शित करने वाला यह परीक्षण कैनिस्टराइज्ड लॉन्चिंग सिस्टम किया गया। इसके लिए ट्रेन को विशेष रूप से डिजाइन किया गया। यह ट्रेन देश के हर उस कोने तक जा सकती है, जहां रेल लाइन मौजूद है। इसके साथ ही भारत रूस, चीन और उत्तर कोरिया के बाद ऐसा करने वाला चौथा देश बन गया है।

डीआरडीओ ने एसएफसी के सहयोग से किया टेस्ट

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अगली पीढ़ी की मिसाइल के परीक्षण के एक दिन बाद गुरुवार को कहा कि इससे भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास रेल नेटवर्क से मिसाइल प्रक्षेपण करने की क्षमता है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सामरिक बल कमान (एसएफसी) के सहयोग से बुधवार को मध्यम दूरी की अग्नि-प्राइम मिसाइल का ‘सफल’ प्रक्षेपण किया।

चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया परीक्षण

प्रक्षेपण ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया। रक्षामंत्री ने कहा कि विशेष रूप से तैयार रेल-आधारित मोबाइल प्रक्षेपण प्रणाली से किया गया यह अपनी तरह का पहला प्रक्षेपण है। उन्होंने कहा कि इसमें रेल नेटवर्क पर चलने की क्षमता है, जिससे उपयोगकर्ता समूचे देश में कहीं भी बेहद कम समय में कम दृश्यता में भी प्रतिक्रिया करने में सक्षम होंगे।

सभी प्रक्षेपण क्षमता सुविधाओं से लैस

मंत्रालय ने कहा कि अग्नि-प्राइम मिसाइल अत्याधुनिक संचार प्रणालियों और सुरक्षा तंत्रों सहित सभी प्रक्षेपण क्षमता सुविधाओं से लैस है। इस प्रक्षेपण के समय डीआरडीओ के वरिष्ठ विज्ञानी और सामरिक बल कमान के अधिकारी मौजूद थे। अग्नि-प्राइम के ‘रोड मोबाइल’ संस्करण को सफल उड़ान परीक्षणों की एक शृंखला के बाद सेवाओं में पहले ही शामिल किया जा चुका है। मिसाइल का परीक्षण भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले सैन्य संघर्ष के साढ़े चार महीने बाद हुआ है।

मिसाइलों को रेल सुरंगों में छिपा भी सकती है सेना

यह परीक्षण भारत के लिए बेहद अहम है क्योंकि किसी भी युद्ध के दौरान सेना को लॉन्चिंग पॉइंट तक जाने वाली रेल लाइन की जरूरत होती है। कुछ मिसाइलों को उनके वजन के चलते मूव करना आसान नहीं होता था लेकिन अब यह परिदृश्य बदल जायेगा। सेना दुश्मन की नजरों से बचाने के लिए अपनी मिसाइलों को रेल सुरंगों में छिपा भी सकती है। भारतीय रेलवे 70 हजार किलोमीटर रेल लाइन के साथ दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है।

कैनिस्टराइज्ड लॉन्च सिस्टम

यह मिसाइल प्रक्षेपण की अत्याधुनिक तकनीक है। इसमें मिसाइल को एक मजबूत कैनिस्टर (बड़े धातु के कंटेनर) में रखा जाता है। यह कैनिस्टर मिसाइल को सुरक्षित रखता है और आसानी से इधर-उधर ले जाने और लॉन्च के लिए तैयार रखता है। कैनिस्टर से मिसाइल को बिना लंबी तैयारी के सीधे दागा जा सकता है। मिसाइल नमी, धूल, मौसम और बाकी विपरीत हालात में सुरक्षित रहती है। ट्रक, रेल या मोबाइल लॉन्चर पर कैनिस्टर रखकर मिसाइल को कहीं भी ले जाया जा सकता है। कैनिस्टर में पैक रहने से मिसाइल के बार-बार मेंटेनेन्स की जरूरत नहीं पड़ती।

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