

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवभक्तों के लिए एक विशेष स्नेह-संदेश पत्र जारी किया गया है, जिसमें भगवान शिव के स्वरूप, उनके प्रतीकों और आध्यात्मिक अर्थों पर चिंतन करने का आह्वान किया गया है। इस संदेश में श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे शिवरात्रि के पर्व को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जागरण के अवसर के रूप में मनाएं। जारी पत्र में शिवलिंग, त्रिनेत्र, बेलपत्र, कलश जल अर्पण, शिव नाम स्मरण और ज्योतिर्लिंग जैसे विषयों से जुड़े प्रश्नों के माध्यम से भक्तों को उनके गहरे अर्थ समझने के लिए प्रेरित किया गया है। संदेश में कहा गया है कि शिव को परमपिता, ज्ञानसागर और शांति के प्रतीक के रूप में याद करते हुए जीवन में सत्य, शांति और संयम के मूल्यों को अपनाना ही सच्ची शिवभक्ति है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, प्रदूषण और नैतिक गिरावट के दौर में आध्यात्मिक जागरूकता की आवश्यकता और बढ़ जाती है। ऐसे समय में शिवरात्रि का पर्व आत्मशुद्धि, सकारात्मक संकल्प और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का संदेश देता है। आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं को शिवरात्रि के दिन ध्यान, योग और ईश्वरीय स्मृति के अभ्यास के लिए आमंत्रित किया गया है। बताया गया है कि इस अवसर पर इच्छुक लोग निःशुल्क आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। यह स्नेह-संदेश प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, कोलकाता सेवा केंद्र की ओर से शिवभक्तों तक पहुंचाया गया है, ताकि पर्व का आध्यात्मिक महत्व अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।