केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग पर एबीवीपी का स्पष्ट रुख, मुद्दे के राजनीतिकरण का विरोध

अंडमान में 20 दिनों से छात्र आंदोलन तेज
केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग पर एबीवीपी का स्पष्ट रुख, मुद्दे के राजनीतिकरण का विरोध
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केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापना की उठी मांग

डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी व्यवस्था समाप्त करने की अपील

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : पिछले 20 दिनों से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस आंदोलन की मुख्य मांग नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंस्टीट्यूट ऑफ हायर लर्निंग (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) की व्यवस्था को समाप्त कर द्वीप समूह में एक पूर्ण विकसित केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना करना है। इसी संदर्भ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने एक स्पष्ट वक्तव्य जारी करते हुए कहा है कि जो भी व्यक्ति या समूह केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग के विरोध में खड़ा होगा, उसका संगठन दृढ़ता से विरोध करेगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा जैसे गंभीर विषय का किसी भी प्रकार से राजनीतिकरण किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। एबीवीपी के प्रतिनिधियों के अनुसार, द्वीप समूह भौगोलिक रूप से मुख्यभूमि भारत से अलग-थलग है, जिसके कारण उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को मुख्यभूमि पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे परिदृश्य में डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी मॉडल छात्रों की आकांक्षाओं और शैक्षणिक अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाया है। परिषद का मानना है कि केवल एक सशक्त और पूर्ण रूप से कार्यशील केंद्रीय विश्वविद्यालय ही द्वीपों के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध सुविधाएं और बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान कर सकता है। संगठन ने आरोप लगाया है कि कुछ राजनीतिक और प्रशासनिक वर्ग जानबूझकर जनता को भ्रमित करने और मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। एबीवीपी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस विषय के राजनीतिकरण के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक और वैचारिक तरीके से विरोध करेगा। पिछले 20 दिनों से विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन, रैलियां और ज्ञापन अभियान चला रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मांग केवल द्वीप समूह के दीर्घकालिक शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से है। एबीवीपी ने प्रशासन से छात्रों की भावनाओं का सम्मान करने, डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से रोकने तथा यथाशीघ्र केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। साथ ही संगठन ने यह भी मांग की है कि पूर्ण विकसित केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना तक द्वीप समूह के सभी सात महाविद्यालयों को पुनः पांडिचेरी विश्वविद्यालय से संबद्ध किया जाए। आंदोलन जारी है और छात्र संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


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