एबीवीपी ने एनएससीबीआईएचएल ट्रांजिट कैंपस कक्ष खाली करने की मांग

ट्रांजिट कैंपस के लिए जेएनआरएम कक्षों का उपयोग रोकें: एबीवीपी
एबीवीपी ने एनएससीबीआईएचएल ट्रांजिट कैंपस कक्ष खाली करने की मांग
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जेएनआरएम छात्रों के हितों के लिए कक्षों की वापसी जरूरी

एबीवीपी ने डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी के कब्जे पर आपत्ति जताई

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह ने जवाहरलाल नेहरू राजकीय महाविद्यालय परिसर में तथाकथित ट्रांजिट कैंपस के रूप में नेताजी सुभाष चंद्र बोस उच्च शिक्षण संस्थान को आवंटित कक्षाओं और अधोसंरचना को तत्काल खाली कराने की औपचारिक मांग की है। सोमवार को जेएनआरएम के प्राचार्य को संबोधित पत्र में एबीवीपी ने कहा है कि एक “अभी स्थापित न हुई” डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी के लिए कक्षाओं का उपयोग वर्तमान जेएनआरएम विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहा है। छात्र संगठन ने जोर देकर कहा कि जेएनआरएम पहले से ही गंभीर अधोसंरचनात्मक सीमाओं के तहत कार्य कर रहा है और यहां कक्षाओं तथा शैक्षणिक स्थान की भारी कमी है। एबीवीपी ने स्पष्ट किया कि जेएनआरएम की अधोसंरचना केवल उसके नामांकित छात्रों के लिए ही आरक्षित रहनी चाहिए और एक नवघोषित संस्थान, जिसकी वैधानिक शैक्षणिक एवं कार्यकारी इकाइयां अभी पूर्ण रूप से स्थापित नहीं हुई हैं, के लिए सीमित सुविधाओं का उपयोग करना अनुचित और अस्वीकार्य है। संगठन ने यह भी कहा कि छात्रों के बीच जारी असंतोष और विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि जमीनी वास्तविकताओं को नजरअंदाज कर निर्णय थोपे जा रहे हैं। छात्र संगठन ने चेतावनी दी कि वर्तमान व्यवस्था को जारी रखना छात्र हितों की जानबूझकर उपेक्षा के रूप में देखा जाएगा। एबीवीपी ने मांग की है कि ट्रांजिट कैंपस के लिए वर्तमान में उपयोग हो रहे सभी कक्ष तत्काल खाली कर जेएनआरएम के शैक्षणिक उपयोग हेतु बहाल किए जाएं। एबीवीपी (अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह) के सचिव सत्यजीत हलदार द्वारा लिखे इस पत्र की प्रतिलिपि माननीय सांसद, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह तथा सचिव (शिक्षा), अंडमान एवं निकोबार प्रशासन को भी आवश्यक हस्तक्षेप के लिए प्रेषित की गई है। एबीवीपी ने छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए संकेत दिया है कि यदि वर्तमान कब्जा वापस नहीं लिया गया तो लोकतांत्रिक आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।


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