

कोलकाता/नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों के खिलाफ लंबित अयोग्यता (डिस्क्वालिफिकेशन) मामलों के शीघ्र निपटारे की मांग को लेकर सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दो अलग-अलग पत्र सौंपे और दल-बदल विरोधी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया।
सूत्रों के अनुसार, पहले पत्र में अभिषेक ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि लंबे समय से इन मामलों के लंबित रहने से न केवल दल-बदल विरोधी कानून की मूल भावना कमजोर हो रही है, बल्कि संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि इन मामलों का समयबद्ध और निष्पक्ष निपटारा किया जाए।
दूसरे पत्र में अभिषेक ने लोकसभा में तृणमूल सांसदों की सीटों की हालिया पुनर्व्यवस्था पर आपत्ति जताई। उन्होंने पुराने बैठक क्रम को बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि सीटों में बदलाव से पार्टी सांसदों की प्रभावी भागीदारी और संसदीय समन्वय प्रभावित हो सकता है।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि संसद की पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने के लिए ऐसे संवेदनशील मामलों का शीघ्र निपटारा आवश्यक है। उनका मानना है कि इससे संसदीय व्यवस्था में स्पष्टता आएगी और दल-बदल विरोधी कानून के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
अब राजनीतिक हलकों की नजर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निर्णय पर टिकी है। माना जा रहा है कि बागी सांसदों की सदस्यता और लोकसभा में सीट व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों पर स्पीकर का फैसला आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति और संसद के शक्ति संतुलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।