अभया के माता-पिता का फूटा गुस्सा, कहा - 'सीमा पाहुजा को जेल भिजवाकर ही दम लेंगे'

Abhaya's parents expressed their anger, saying, "We will not rest until Seema Pahuja is sent to jail."
सांकेतिक फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

पानीहाटी : आरजी कर मेडिकल कॉलेज की मृत महिला चिकित्सक (अभया) के माता-पिता ने एक बार फिर न्याय प्रणाली और जांच प्रक्रिया पर अपना गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। इस बार उनके निशाने पर सीधे तौर पर सीबीआई की जांच अधिकारी सीमा पाहुजा हैं। सीमा पाहुजा की पदोन्नति (Promotion) की खबरों ने आग में घी डालने का काम किया है। क्षुब्ध माता-पिता ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिस अधिकारी ने उनकी बेटी के केस में लापरवाही बरती, उसे वे जेल भिजवाकर ही दम लेंगे।

पदोन्नति की खबर से भड़का आक्रोश

अभया के पिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक तरफ उनकी बेटी को इंसाफ नहीं मिला है, वहीं दूसरी तरफ केस से जुड़ी मुख्य जांच अधिकारी को प्रमोट किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा पाहुजा पिछले चार महीनों से उनके संपर्क में नहीं हैं। माता-पिता का आरोप है कि जांच अधिकारी ने मामले की तह तक जाने के बजाय केवल औपचारिकताएं पूरी की हैं।

जांच में लापरवाही के गंभीर आरोप

मृतक डॉक्टर के परिजनों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि सीबीआई अधिकारी सीमा पाहुजा ने स्वतंत्र जांच करने के बजाय पूरी तरह से कोलकाता पुलिस की पुरानी रिपोर्ट पर भरोसा किया। परिजनों का दावा है:

  • संपर्क का अभाव: पिछले 120 दिनों से जांच अधिकारी ने परिवार को केस की प्रगति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

  • पुलिस रिपोर्ट पर निर्भरता: परिजनों का कहना है कि सीबीआई ने खुद की कोई ठोस जांच नहीं की, बल्कि पुलिस की थ्योरी को ही आगे बढ़ाया है।

  • अदालत में स्वीकारोक्ति: माता-पिता का दावा है कि सीमा पाहुजा ने खुद अदालत में यह स्वीकार किया है कि उन्होंने शुरुआती जांच के लिए स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट का ही सहारा लिया।

'हमें इंसाफ चाहिए, प्रमोशन नहीं'

तल्ख तेवर अपनाते हुए तिलोत्तमा की मां ने कहा, "हमारी बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी गई और जांच अधिकारी केस को सुलझाने के बजाय लापरवाही बरत रही हैं। ऐसी अधिकारी को इनाम के तौर पर पदोन्नति देना न्याय का मजाक उड़ाना है। हम चुप नहीं बैठेंगे। हम इस मुद्दे को उच्च स्तर तक ले जाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि कर्तव्य में लापरवाही बरतने के लिए उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए।"

न्याय की उम्मीद धुंधली?

इस बयान के बाद कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। तिलोत्तमा के माता-पिता का यह आक्रोश उस दर्द और हताशा को दर्शाता है जो महीनों बीत जाने के बाद भी न्याय न मिलने के कारण पैदा हुआ है। उनका मानना है कि जब तक जांच एजेंसी के भीतर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक उनकी बेटी की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।

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