

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
नदिया (पश्चिम बंगाल): नए साल की शुरुआत में जहाँ सीमाओं पर सुरक्षा और सतर्कता चरम पर है, वहीं भारत-बांग्लादेश सीमा से एक ऐसी खबर आई है जिसने दोनों देशों के नागरिकों की आँखों को नम कर दिया। राजनीतिक उतार-चढ़ाव और कूटनीतिक कड़वाहट के बीच सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने एक बेटी के प्रति अपनी मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए उसे अपने मृत पिता का आखिरी बार चेहरा देखने का अवसर प्रदान किया।
क्या है पूरा मामला?
घटना नदिया जिले के चापड़ा थाना अंतर्गत हटखोला गांव की है। यहाँ के निवासी 101 वर्षीय इसराफिल हालसोना का लंबी उम्र के कारण निधन हो गया। इसराफिल की बेटी, ओमेहार बीबी, सीमा के उस पार बांग्लादेश के चुआडांगा जिले के कुतुबपुर गांव में रहती हैं। पिता की मृत्यु की खबर मिलते ही ओमेहार बीबी का बुरा हाल हो गया। सीमाओं पर लगी कँटीली तारों की वजह से उनका तुरंत भारत आना संभव नहीं था, लेकिन उनकी अंतिम इच्छा थी कि वे अपने पिता को आखिरी बार देख सकें।
BSF और BGB का मानवीय सहयोग
परिवार ने इस विवशता को देखते हुए BSF की 161वीं बटालियन से संपर्क किया और मानवीय आधार पर मदद की गुहार लगाई। वर्तमान में बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और अशांति के बाद सीमा पर कड़ी चौकसी है, फिर भी BSF ने मामले की संवेदनशीलता को समझा। भारतीय जवानों ने तुरंत बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बल (BGB) से संपर्क साधा।
दोनों देशों के अधिकारियों के बीच आपसी सहमति बनी और हटখোला सीमा की 'जीरो लाइन' (नो मैन्स लैंड) पर एक विशेष व्यवस्था की गई। BSF के जवान इसराफिल हालसोना के पार्थिव शरीर को सीमा के पास लेकर आए, जहाँ कँटीली तारों के पास से ही ओमेहार बीबी ने अपने पिता के अंतिम दर्शन किए।
भावुक क्षण और आभार
जैसे ही ओमेहार बीबी ने अपने पिता का चेहरा देखा, वह फूट-फूट कर रोने लगीं। सीमा पर मौजूद सुरक्षाकर्मी और स्थानीय ग्रामीण भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए। कुछ समय के लिए वहां का माहौल गमगीन हो गया। दर्शन के बाद परिवार ने दोनों देशों की सेनाओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। परिवार के सदस्यों का कहना था कि अगर प्रशासन और BSF मदद न करते, तो एक बेटी अपने पिता को अंतिम विदाई भी नहीं दे पाती।
तनाव के बीच एक सकारात्मक संदेश
हाल के दिनों में बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन और मोहम्मद यूनुस के कार्यभार संभालने के बाद से सीमा पर घुसपैठ और हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं को लेकर काफी तनाव बना हुआ है। कई भारतीयों को बांग्लादेश से 'पुश बैक' किए जाने और जेलों में बंद होने की खबरें भी सामने आती रही हैं। ऐसे कठिन समय में चापड़ा सीमा पर दिखाई गई यह उदारता यह दर्शाती है कि वर्दी के पीछे भी एक संवेदनशील दिल होता है जो कूटनीति से ऊपर उठकर मानवता को प्राथमिकता देता है।