'अभया' के 33वें जन्मदिन पर न्याय की मशाल

गमगीन माहौल में पानीहाटी की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
A torch of justice on Abhaya's 33rd birthday.
इंसाफ की मांग पर सोदपुर में निकाली जा रही रैली
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

पानीहाटी: अगर नियति ने क्रूर खेल न खेला होता और समाज अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल न रहा होता, तो आज आरजी कर मेडिकल कॉलेज की वह प्रतिभावान डॉक्टर अपना 33वां जन्मदिन मना रही होती। 9 अगस्त 2024 की उस काली रात ने न केवल एक होनहार डॉक्टर की जान ली, बल्कि पूरी मानवता को शर्मसार कर दिया था। सोमवार को उसी 'अभया' के 33वें जन्मदिन के अवसर पर 'अभया मंच' की ओर से न्याय की मांग को लेकर एक विशाल मशाल जुलूस निकाला गया। पानीहाटी के नाटागढ़ स्थित उनके आवास से शुरू हुआ यह आंदोलन सोदपुर ट्रैफिक मोड़ तक पहुँचते-पहुँचते इंसाफ की एक बुलंद गूँज में तब्दील हो गया।

मां के हाथों में मशाल और आंखों में आंसू

इस भावुक मशाल जुलूस का शुभारंभ अभया की मां ने किया। अपनी दिवंगत बेटी की तस्वीर और हाथ में जलती हुई मशाल लेकर जब वह सड़कों पर निकलीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। उनके साथ प्रसिद्ध नाटककार एवं निर्देशक चंदन सेन, आंदोलन के प्रमुख चेहरे डॉ. तमोनाश चौधरी, डॉ. सुवर्ण गोस्वामी सहित पानीहाटी, कमरहाटी, खरदह और बैरकपुर के विभिन्न अंचलों से आए भारी संख्या में लोग शामिल हुए।

A torch of justice on Abhaya's 33rd birthday.
अभया मंच से जुड़े लोगों ने निकाली रैली

33 पौधे और शिक्षा सामग्री का वितरण

अभया की यादों को सार्थक बनाने के लिए इस दिन को केवल विरोध तक सीमित नहीं रखा गया। उनके 33वें जन्मदिन के प्रतीक के रूप में कुछ सकारात्मक कार्य किए गए:

  • 33 मेधावी छात्र-छात्राओं को मदद: आर्थिक रूप से पिछड़े 33 विद्यार्थियों के हाथों में शिक्षा सामग्री और स्कूल किट सौंपी गई।

  • 33 पौधों का वितरण: प्रकृति और जीवन के प्रति अभया के प्रेम को याद करते हुए 33 पौधे वितरित किए गए और लगाए गए।

सड़कों पर उमड़ा जन-आक्रोश

यह जुलूस नाटागढ़ मेन रोड, सोदपुर-मध्यमग्राम रोड और सोदपुर स्टेशन रोड से होते हुए सोदपुर ट्रैफिक मोड़ पर समाप्त हुआ। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक ही सुर में न्याय की मांग की। लोगों का कहना था कि समाज भले ही उस रात उसे न बचा पाया हो, लेकिन जब तक अभया के दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिल जाती, यह मशाल बुझने वाली नहीं है। चित्तरंजन पार्क की वे गलियां आज उसकी यादों और 'इंसाफ' की पुकार से गूंजती रहीं।

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