निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बशीरहाट : उत्तर 24 परगना जिले के अंतर्गत बशीरहाट के बादुड़िया थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक माध्यमिक परीक्षार्थी (10वीं कक्षा का छात्र) को केवल इसलिए बेरहमी से पीटा गया क्योंकि उसने अपने पिता के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी का विरोध किया था। इस मामले में एक आईएसएफ (ISF) नेता पर गंभीर आरोप लगे हैं।
घटना बादुड़िया के उत्तर शेरपुर इलाके की है। पीड़ित छात्र यदुरहाटी आदर्श विद्यापीठ का छात्र है और वर्तमान में माध्यमिक परीक्षा दे रहा है। उसके पिता जामिरुल मंडल स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पंचायत सदस्य हैं।
शिकायत के अनुसार, रविवार रात छात्र पड़ोसी और आईएसएफ नेता हसनूर सरकार के घर के सामने से गुजर रहा था। आरोप है कि उस समय हसनूर सरकार छात्र के पिता को लेकर अपशब्द कह रहा था। जब छात्र ने अपने पिता के अपमान का विरोध किया, तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि आईएसएफ नेता छात्र को जबरन अपने घर के अंदर खींच ले गया, उसे कमरे में बंद कर दिया और बेतहाशा पिटाई की।
छात्र की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुँचे और उसे बचाया। गंभीर रूप से घायल और बीमार छात्र को तुरंत बादुड़िया ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। हालांकि, सोमवार सुबह उसकी बोर्ड परीक्षा थी। भविष्य को ध्यान में रखते हुए, लगभग 6 घंटे तक अस्पताल में उपचाराधीन रहने के बाद, परिजनों ने डॉक्टरों से अनुरोध कर उसे भोर में ही डिस्चार्ज करा लिया ताकि वह परीक्षा केंद्र पहुँच सके।
छात्र के पिता जामिरुल मंडल का दावा है कि यह हमला पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है। उन्होंने बताया, "मैंने आईएसएफ के टिकट पर पंचायत चुनाव जीता था, लेकिन बाद में तृणमूल में शामिल हो गया। इसी गुस्से में आईएसएफ नेता ने मेरे बेटे को निशाना बनाया और उसे कमरे में बंद कर बुरी तरह पीटा।"
बादुड़िया थाना पुलिस ने छात्र के परिवार की शिकायत के आधार पर आरोपी आईएसएफ नेता हसनूर सरकार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। घटना के बाद से ही आरोपी फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। वहीं, टीएमसी नेतृत्व ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोपी के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की है। हालांकि, आईएसएफ की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इस घटना ने परीक्षा के माहौल के बीच इलाके में तनाव पैदा कर दिया है, लेकिन शारीरिक कष्ट के बावजूद परीक्षा देने के छात्र के हौसले की हर तरफ चर्चा हो रही है।