राज्य में पहली बार ! कचरा प्रबंधन के लिए जियो-टैगिंग और GPS तकनीक की बारासात में हुई शुरुआत

A first for the state! Geo-tagging and GPS technology introduced for waste management in Barasat.
फाइल फोटो
Published on

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बारासात : उत्तर 24 परगना जिले के बारासात महकमा अंतर्गत अशोकनगर-कल्याणगढ़ नगरपालिका ने स्वच्छता और शहरी प्रबंधन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। नगरपालिका ने कचरा प्रबंधन को पूरी तरह से डिजिटल बनाने के लिए राज्य में पहली बार जियो-टैगिंग और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम की शुरुआत की है। ​बारासात महकमे में अपनी तरह की इस पहली पहल के तहत अशोकनगर-कल्याणगढ़ नगरपालिका ने अपने वार्डों को कचरा मुक्त बनाने के लिए डिजिटलीकरण का सहारा लिया है। नगरपालिका के कुल 23 वार्डों में से फिलहाल प्रायोगिक (Pilot) तौर पर वार्ड नंबर 10 और 14 को चुना गया है। इन वार्डों में घर-घर जाकर यूनिक क्यूआर कोड (Unique QR Code) लगाने का काम शुरू हो चुका है।

कैसे काम करेगी यह प्रणाली?

इस नई तकनीक का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक घर से कचरा संग्रह की 100% सटीकता सुनिश्चित करना है। इसकी कार्यप्रणाली कुछ इस प्रकार है:

  • यूनिक क्यूआर कोड: हर घर के बाहर एक विशेष क्यूआर कोड लगाया जाएगा, जिसमें घर के मालिक और पते से जुड़ी सभी जानकारी डिजिटल रूप में सुरक्षित होगी।

  • निर्मल बंधु और डिवाइस: जब सफाई कर्मचारी (निर्मल बंधु) कचरा लेने आएंगे, तो वे अपने विशेष डिवाइस से इस कोड को स्कैन करेंगे।

  • डेटा संग्रहण: स्कैन करते ही यह जानकारी सर्वर पर अपलोड हो जाएगी कि उस घर से कचरा उठाया गया है या नहीं। साथ ही, यह भी पता चलेगा कि किस घर से किस प्रकार का कचरा (गीला या सूखा) अधिक निकल रहा है।

बीमारियों पर लगाम और बेहतर योजना

नगरपालिका का मानना है कि इस डेटा के आधार पर कचरा प्रबंधन की भविष्य की योजनाएं बनाना आसान होगा।

  1. स्वास्थ्य सुरक्षा: अक्सर घरों में जमा कचरे या गंदे पानी से डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियां फैलती हैं। जीपीएस ट्रैकिंग के माध्यम से अब अधिकारी यह निगरानी रख सकेंगे कि किन इलाकों में सफाई नियमित नहीं हो रही है, जिससे बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकेगा।

  2. कर्मचारियों की निगरानी: वार्ड नंबर 14 के प्रतिनिधि तापस भट्टाचार्य के अनुसार, इस सिस्टम से यह भी पता चलेगा कि सफाई कर्मचारी अपना काम ठीक से कर रहे हैं या नहीं।

भविष्य की योजना

नगरपालिका के चेयरमैन प्रबोध सरकार ने बताया कि फिलहाल इसे दो वार्डों में शुरू किया गया है, लेकिन जल्द ही इसे नगरपालिका के सभी 23 वार्डों में लागू किया जाएगा। नोडल अधिकारी सिद्धार्थ मुखोपाध्याय के अनुसार, इससे पूरे क्षेत्र के कचरे का एक पूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड (लेखा-जोखा) तैयार हो सकेगा, जो शहर को साफ-सुथरा रखने में मील का पत्थर साबित होगा।

स्थानीय निवासी भी इस आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से काफी खुश हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि अब उनका इलाका अधिक स्वच्छ और स्वास्थ्यप्रद बनेगा।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in