देश की कंपनी बनायेगी QRSAM, सुदर्शन चक्र

QRSAM थल सेना को दुश्मन विमान, ड्रोन से बचायेगी, 30 किमी रेंज, 360 डिग्री रडार, केबिनेट की मंजूरी जल्द
New Delhi
सार्वजनिक क्षेत्र का प्रमुख रक्षा प्रतिष्ठान भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)
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नयी दिल्ली : सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख रक्षा प्रतिष्ठान भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एअर मिसाइल (QRSAM) प्रणाली और ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के उत्पादन की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

क्वालिफिकेशन टेस्टिंग पर काम शुरू

BEL ने फर्स्ट ऑफ प्रोडक्शन मॉडल (FOPM) और क्वालिफिकेशन टेस्टिंग पर काम शुरू कर दिया है। यह कदम उस संभावित बड़े रक्षा सौदे से पहले उठाया गया है जिसकी कीमत लगभग 30,000 करोड़ रुपये बतायी जा रही है।

BEL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज जैन के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। अंतिम डील सरकारी मंजूरी और बातचीत पर निर्भर करेगा। मिशन सुदर्शन चक्र (IADWS) DRDO द्वारा विकसित एक स्वदेशी इंटीग्रेटेड एअर डिफेंस वेपन सिस्टम है। यह हवाई हमलों, ड्रोनों और मिसाइलों को सीमा से दूर हवा में ही नष्ट करने का काम करेगा।

QRSAM और इसकी खासियत

QRSAM एक तेज प्रतिक्रिया वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। इसे मुख्य रूप से भारतीय सेना की चलती हुई इकाइयों की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है। यह सिस्टम लड़ाकू विमानों, हेलिकॉप्टरों, ड्रोन और सटीक निर्देशित हथियारों से बचाव कर सकता है।

इसकी सबसे बड़ी ताकत मोबाइल रडार नेटवर्क है जो 360 डिग्री निगरानी प्रदान करता है। मिसाइल की मारक क्षमता करीब 30 किलोमीटर तक है। यानी इसमें हवाई खतरे को दूर से ही रोकने की क्षमता है। सेना की इकाइयां युद्ध के मैदान में तेजी से आगे बढ़ती हैं। ऐसे में स्थिर रक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती। QRSAM मोबाइल होने के कारण इन इकाइयों के साथ चल सकता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है।

BEL की शुरुआती तैयारी का मतलब

आमतौर पर रक्षा सौदों में अंतिम अनुबंध के बाद उत्पादन शुरू होता है। इसमें कई महीने लग जाते हैं। BEL ने इस बार अलग रास्ता चुना है। BEL और उसके सप्लाई चेन पार्टनरों ने अंतिम अनुबंध मिलने से पहले ही उत्पादन संबंधी काम शुरू कर दिया है। इसमें फर्स्ट ऑफ प्रोडक्शन मॉडल बनाना और क्वालिफिकेशन टेस्टिंग शामिल है।

जैन ने स्पष्ट किया कि CCS से मंजूरी जल्द आने की उम्मीद है। इस तैयारी से मंजूरी मिलने के बाद कई महीने बचाये जा सकते हैं। रक्षा उत्पादन में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। देरी से सेना को सिस्टम मिलने में लगने वाला समय बढ़ जाता है। इस बड़े प्रोजेक्ट में भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL), लार्सन एंड टुब्रो (L&T), अपोलो माइक्रो सिस्टम्स और एस्ट्रा माइक्रोवेव जैसी कंपनियां भी मिसाइल लेयर, लॉन्चर और रडार सबसिस्टम के स्तर पर जुड़ी हुई हैं।

30,000 करोड़ की डील

प्रस्तावित ऑर्डर करीब 30,000 करोड़ रुपये का है। यह राशि भारतीय रक्षा उद्योग के लिए काफी बड़ा है। इससे BEL की उत्पादन क्षमता और राजस्व दोनों को मजबूती मिलेगी। साथ ही घरेलू सप्लाई चेन में लगे छोटे-मझोले उद्योगों को भी काम मिलेगा। रक्षा क्षेत्र में बड़े ऑर्डर से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और तकनीकी विशेषज्ञता का विकास होता है। ड्रोन और प्रिसिजन गाइडेड हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए ऐसी तेज प्रतिक्रिया वाली प्रणाली की जरूरत और बढ़ गयी है।

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