

नयी दिल्ली : केंद्र ने देश के सबसे व्यस्त रेलवे मार्गों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में बुधवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता, कोलकाता-दिल्ली सहित सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर को चार-ट्रैक क्षमता वाला बनाने के लिए रेल मंत्रालय की 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी।
दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता सबसे व्यस्त रूट
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन परियोजनाओं से रेलवे के उन प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम होगा, जहां देश के कुल रेल यातायात का बड़ा हिस्सा संचालित होता है। इनमें दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता के दो विकर्ण मार्ग तथा दिल्ली-गुवाहाटी मार्ग भी शामिल हैं। इन कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 11 हजार किलोमीटर है और इन पर रेलवे का लगभग 40 फीसदी यातायात चलता है।
2,000 किमी हिस्से पर चार लाइन बिछाने का काम पूरा
वैष्णव ने बताया कि हाई डेंसिटी नेटवर्क में करीब 2,000 किलोमीटर हिस्से पर चार लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है। करीब 5,000 किलोमीटर हिस्से पर काम चल रहा है या परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। शेष करीब 4,000 किलोमीटर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी नेटवर्क के खड़गपुर-झारसुगुड़ा खंड में 367 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर करीब 6,528 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
अरक्कोनम-रेनिगुंटा खंड में 77 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी लाइन
वहीं अरक्कोनम-रेनिगुंटा खंड में 77 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जायेगी। इस पर करीब 1,936 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा बिलासपुर-पेंड्रा और पेंड्रा से कटनी की ओर जाने वाले मार्ग को भी चार लाइन वाला बनाने की योजना है। इस क्षेत्र में कहीं दो और कहीं तीन लाइनें पहले से मौजूद हैं। ऐसे में पूरे बिलासपुर-कटनी खंड की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
पांच राज्यों के 14 जिलों को फायदा
इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। लगभग 4,790 गांवों के 56 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। नयी रेल लाइनों से खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने के साथ यात्री परिवहन को भी गति मिलेगी। खासकर छत्तीसगढ़ और आसपास के आदिवासी एवं ऊर्जा क्षेत्र के लिए इन परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी सुधरेगी
रेल नेटवर्क मजबूत होने से तारातारिणी मंदिर, झारसुगुड़ा का जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक, ज्वालेश्वर धाम, अचनकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी।