

नई दिल्लीः बेहतर करियर एवं पैसे कमाने के लिए भारत से विदेश जाने का मजबूत रुझान देखा गया। एक सर्वेक्षण में आधे से अधिक प्रतिभागियों ने विदेश जाने के बारे में सोचा या वे इसके लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत रहे।
एआई-सक्षम वैश्विक प्रतिभा आवाजाही मंच टर्न ग्रुप के हाल के एक सर्वेक्षण में 52 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने विदेश जाने पर विचार करने या इसकी सक्रिय तैयारी करने की बात कही। यह सर्वेक्षण देशभर में करीब 8,000 लोगों से बातचीत पर आधारित है।
सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय विकास भारत से बाहर जाने का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा। करीब 46 प्रतिशत लोगों ने इस वजह से विदेश जाने की मंशा जताई। इसके बाद बेहतर करियर की तलाश के लिए 34 प्रतिशत लोग विदेश जाने को तैयार दिखे। इसके अलावा व्यक्तिगत सपने और वैश्विक अनुभव भी क्रमशः नौ प्रतिशत और चार प्रतिशत उत्तरदाताओं के लिए कारण रहे।
रिपोर्ट कहती है कि विदेशी प्रवास को लेकर भारतीयों की पसंद में भी बदलाव आ रहा है। करीब 52 प्रतिशत लोगों ने समय के साथ अपनी पसंदीदा जगह बदली है, जबकि 43 प्रतिशत ने अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए स्पष्ट प्राथमिकता जताई। जर्मनी 43 प्रतिशत लोगों की पसंद के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद ब्रिटेन 17 प्रतिशत, जापान नौ प्रतिशत और अमेरिका चार प्रतिशत लोगों की पसंद रहा।
भाषा सबसे बड़ी समस्या
विदेश जाने की इच्छा रखने वाली भारतीय नर्सों के रुझान में क्षेत्रीय विविधता भी देखने को मिली। विदेश जाने वाली 61 प्रतिशत नर्सें प्रमुख महानगरों से बाहर से संबंधित हैं जबकि दिल्ली-एनसीआर से 17 प्रतिशत नर्सों ने विदेश जाने की बात कही। हालांकि, करियर एवं पैसे के लिए विदेश जाने की राह में चुनौतियां बनी हुई हैं। भाषा की जरूरतों को 44 प्रतिशत लोगों ने सबसे बड़ी बाधा बताया। इसके अलावा, अनैतिक भर्ती, मार्गदर्शन का अभाव, अधिक खर्च और लंबी प्रक्रियाएं भी प्रमुख समस्याओं के रूप में उभरीं।
टर्न ग्रुप के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी अविनव निगम ने कहा, "भारतीय प्रतिभा वैश्विक करियर के लिए तैयार है लेकिन इसके लिए पारदर्शी, नैतिक और शून्य-शुल्क वाली भर्ती व्यवस्था जैसे समर्थनकारी कदम उठाने की जरूरत है।"