

बुरहानपुर : मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव ने खुद को ‘गाली-मुक्त’ घोषित करते हुए अपशब्दों के इस्तेमाल पर सख्त नियम लागू किए हैं। गांव में अब गाली देने पर ₹500 का जुर्माना या एक घंटे की सामुदायिक सेवा, जैसे सड़कों की सफाई, करनी होगी।
कुछ हजार की आबादी वाले इस गांव के लोगों ने मिलकर दैनिक जीवन से अपशब्दों को खत्म करने का संकल्प लिया है। यह फैसला सामूहिक सहमति से लिया गया है और इसके तहत पूरे गांव में ‘संस्कार क्रांति’ अभियान शुरू किया गया है।
इस पहल की शुरुआत अश्विन पाटिल ने की, जो करीब 20 साल मुंबई में रहने के बाद कुछ महीने पहले गांव लौटे थे। उन्होंने देखा कि छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौज के कारण झगड़े बढ़ जाते हैं। इसके बाद उन्होंने गांव को गाली-मुक्त बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सरपंच और उपसरपंच सहित ग्रामीणों का समर्थन मिला।
अश्विन पाटिल ने बताया कि पहले पंचायत से चर्चा की गई, फिर गांव के लोगों से बातचीत कर सामूहिक निर्णय लिया गया। पूरे गांव में ‘गाली-मुक्त’ बैनर लगाए गए हैं और पंचायत की ओर से हस्ताक्षरित पत्र हर घर तक पहुंचाया गया है।
नियमों को लागू करने के लिए गांव में बैठक आयोजित कर सभी लोगों को आचार संहिता और दंड की जानकारी दी गई। हर वार्ड में निगरानी समितियां बनाई गई हैं, जो नियमों के पालन पर नजर रखेंगी और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगी। इस पहल का उद्देश्य गांव में शांति, आपसी सम्मान और सकारात्मक माहौल बनाए रखना है।