जादवपुर में सियासी नारों के बीच 39 बंगाल बटालियन की कदमताल

1964 में कैंपस में शुरू हुआ एनसीसी का सफर
39 बंगाल बटालियन कार्यालय, जेयू
39 बंगाल बटालियन कार्यालय, जेयू
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कोलकाता : जादवपुर विश्वविद्यालय में नारों, वैचारिक बहसों और राजनीतिक गतिविधियों की गूंज के बीच परिसर के एक हिस्से में सुबह की शुरुआत अलग अंदाज में होती है—“एक... दो... एक...”। सीटी बजती है, कदम एक साथ उठते हैं और वर्दी में सजे कैडेट अनुशासन की लय में आगे बढ़ते हैं।

जादवपुर में एनसीसी की कहानी करीब छह दशक पुरानी है। यूनिट में लगे बोर्ड गवां हैं कि पूर्व कुलपति डॉ. त्रिगुणा सेन के कार्यकाल में 1964 में यहां एनसीसी इकाई शुरू हुई थी। आज करीब 20-22 अधिकारियों और कर्मचारियों वाली 39 बंगाल बटालियन परिसर से अपनी गतिविधियां संचालित करती है। 1998 से बटालियन आसपास के करीब 20 स्कूलों के कैडेटों को सैन्य-आधारित प्रशिक्षण के साथ नेतृत्व, आत्मविश्वास, टीम भावना और राष्ट्रसेवा से जुड़े मूल्यों की सीख दे रही है।

यहां वर्दी किसी राजनीतिक पहचान का प्रतीक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का परिचय है। विश्वविद्यालय में राजनीतिक गतिविधियां और वैचारिक बहसें तेज होने के बावजूद बटालियन का प्रशिक्षण अपनी निर्धारित दिनचर्या के अनुसार चलता रहता है। कैडेट प्रशिक्षण के साथ सामाजिक सरोकारों पर भी जोर दिया जाता रहा है।

अगस्त 2023 में एनसीसी पश्चिम बंगाल-सिक्किम निदेशालय के तत्कालीन एडीजी मेजर जनरल विवेक त्यागी ने जादवपुर विश्वविद्यालय के तत्कालीन कार्यवाहक कुलपति से मुलाकात कर कैडेट प्रशिक्षण सहित एनसीसी से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की थी।

राष्ट्रीय पर्वों और एनसीसी दिवस जैसे अवसरों पर 2 बटालियन एयर स्क्वाड्रन, 4 बंगाल (टेक्निकल) एयर स्क्वाड्रन एनसीसी और 1 बंगाल कंपनी (टी) रेजिमेंट की इकाइयां भी कार्यक्रमों में हिस्सा लेती हैं।

5 गोरखा राइफल्स से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “विश्वविद्यालय में बाहर क्या चल रहा है, इसकी हमें बहुत कम जानकारी रहती है। हमारे लिए यह जगह शांत है। आम नागरिकों से भी हमारा संपर्क सीमित रहता है। कभी-कभार स्कूलों के विद्यार्थी प्रशिक्षण के लिए आते हैं।”

उन्होंने कहा, “मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों की एनसीसी में रुचि देखकर खुशी होती है। ये बच्चे देश का भविष्य हैं। उन्हें उचित प्रशिक्षण देना हमारा कर्तव्य है, ताकि वे आगे जाकर देश की सेवा कर सकें।”

जादवपुर के इस कोने में कदमताल केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि अनुशासन, जिम्मेदारी और सेवा-भावना के प्रशिक्षण का हिस्सा है। पिछले छह दशको से यहां राजनीतिक तपिश से दूर हर कदम कैडेटों को बेहतर नागरिक और जिम्मेदार नेतृत्व के लिए तैयार करने की कोशिश करता है।

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