

बालाघाट: कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संयोजक अभिजीत दिपके ने शनिवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी गांवों का दौरा किया। उन्होंने हाल में कथित संक्रामक बीमारियों से अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। दिपके ने स्थानीय युवाओं के साथ अडोरी, कोरका और बोंदारी गांवों का दौरा कर स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों की मौत की परिस्थितियों की जानकारी ली।
यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ ने बालाघाट में कथित संक्रामक बीमारियों के कारण 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। जनहित याचिका में इन मौतों के पीछे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी समेत कई गंभीर कारणों का आरोप लगाया गया है।
इस सप्ताह की शुरुआत में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल के खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बालाघाट के जिलाधिकारी समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में आगे की कार्रवाई सरकार के जवाब और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी।
अस्पतालों में क्षमता से कई गुना मरीज
याचिका में दावा किया गया है कि प्रभावित क्षेत्रों के अस्पतालों में मरीजों की संख्या क्षमता से काफी अधिक है। एक 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों के इलाज का आरोप लगाया गया है। याचिका में बच्चों को पर्याप्त इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने की बात भी कही गई है।
याचिका में प्रभावित आदिवासी इलाकों में पेयजल व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई हैंडपंपों से गंदा पानी आ रहा है। साथ ही बच्चों और महिलाओं को कई महीनों से समय पर पौष्टिक आहार नहीं मिलने का भी दावा किया गया है। इन परिस्थितियों को बच्चों की सेहत पर गंभीर असर डालने वाला बताया गया है।
दिपके ने संवाददाताओं से कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके प्रति उनकी पूरी संवेदना है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन की कथित निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों ने मौतों की संख्या स्वीकार की है, लेकिन अब तक जिम्मेदारी तय नहीं की गई और किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।