सड़कों पर उतरीं 25 प्रतिशत बसें मगर यात्रियों की परेशानी बरकरार

सोमवार से 75 प्रतिशत बसें दौड़ेंगी सड़कों पर
25% Buses on Road, 75% from Monday; Transport Crisis in Kolkata After Polls.
फाइल फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान संपन्न होने के बाद भी महानगर कोलकाता और पड़ोसी जिलों में परिवहन व्यवस्था सामान्य नहीं हो पाई है। गुरुवार को सड़कों पर बसों की भारी किल्लत देखी गई, जिससे यात्रियों को भीषण परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि बस मालिकों ने सेवाएं बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन आम जनजीवन को राहत मिलने में अभी थोड़ा समय और लगेगा।

बारिश और कर्मियों की कमी ने बिगाड़ा खेल

मिनी बस व बस ओनर्स एसोसिएशन के नेता प्रदीप नारायण बोस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि गुरुवार को महानगर में केवल 25 प्रतिशत बसों का ही परिचालन हो सका। इसके पीछे मुख्य कारण बुधवार रात हुई भारी बारिश और खराब मौसम रहा। मतदान ड्यूटी के बाद कई बस कर्मी अपने घरों या सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे, जो खराब मौसम के कारण गुरुवार सुबह तक वापस नहीं लौट पाए।

एसोसिएशन के अनुसार, शुक्रवार से सुधार की उम्मीद है और लगभग 50 प्रतिशत बसें सड़कों पर दौड़ेंगी। हालांकि, शनिवार और रविवार को छुट्टी का दिन होने और सभी बस कर्मियों की उपलब्धता न होने के कारण रविवार तक यात्रियों को थोड़ी किल्लत झेलनी पड़ सकती है। राहत की खबर यह है कि सोमवार को चुनाव परिणामों के दिन तक लगभग 75 प्रतिशत बस सेवाएं पूरी तरह बहाल हो जाएंगी।

कैब किराये की मार और यात्रियों का बढ़ता आक्रोश

बसों की अनुपलब्धता का सबसे खौफनाक मंजर किराये के रूप में सामने आया है। हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और हुगली जैसे क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। बस स्टैंड पर घंटों खड़े रहने के बाद भी जब बसें नहीं मिलीं, तो यात्रियों को कैब का सहारा लेना पड़ा। मांग अधिक और वाहन कम होने के कारण कैब ऑपरेटरों ने मनमाना किराया वसूला।

यात्रियों का आरोप है कि सामान्य दिनों में जिस दूरी के लिए 200 से 300 रुपये देने पड़ते थे, उसके लिए आज 600 से 800 रुपये तक वसूले गए। दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और छात्रों का कहना है कि बसों की कमी का फायदा सीधे तौर पर कैब चालक उठा रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में चुनावों के दौरान आम जनता के आवागमन के लिए वैकल्पिक बसों की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि यात्रियों की मजबूरी का इस तरह आर्थिक फायदा न उठाया जा सके।

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