

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा : तृणमूल कांग्रेस के ऐतिहासिक '21 जुलाई शहीद दिवस' को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों और संगठनात्मक खींचतान के बीच एक शहीद के परिवार ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त की है। साल 1993 की पुलिस फायरिंग में मारे गए 13 शहीदों में से एक, रंजीत दास की पत्नी अर्पिता दास (जो वर्तमान में हावड़ा के मौड़ीग्राम में रहती हैं) ने स्पष्ट कहा है कि भले ही इस बार कोई बड़ी रैली न हो, लेकिन वह हमेशा दीदी के साथ खड़ी रहेंगी।
कहा- रैली हो या न हो, हमेशा 'दीदी' के साथ रहेंगे
अर्पिता ने 33 साल पुराने उस खौफनाक दिन को याद करते हुए बताया कि जब उनके पति की मौत हुई, तब उनका एक बच्चा ढाई साल का था और वह खुद 9 महीने की गर्भवती थीं। संकट के उस दौर में ममता बनर्जी ने उनकी हर संभव मदद की। रेल मंत्री रहते हुए 2001 में ममता ने अर्पिता के लिए नौकरी की व्यवस्था की, जिससे वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दे सकीं। हर साल धर्मतला के मंच पर सम्मानित होने वाली अर्पिता ने कहा, "ममता बनर्जी हमारे परिवार को कभी नहीं भूलीं। रैली हो या न हो, मैं उनसे मिलने कालीघाट जरूर जाऊंगी। राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद मेरा भरोसा दीदी पर कायम है और वह फिर से वापसी करेंगी।"