

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के अंतर-विश्वविद्यालय ट्रांसफर बिल को लेकर शिक्षा जगत में विरोध शुरू हो गया है और 18 प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। ''एसोसिएशन ऑफ बंगाल यूनिवर्सिटी टीचर्स'' (ABUTA) के बयान के मुताबिक, 8 अक्टूबर को आयोजित एक अखिल भारतीय ऑनलाइन विरोध बैठक में यह आवाज उठाई गई, जिसमें विभिन्न शिक्षक संगठनों ने हिस्सा लिया। उल्लेखनीय है कि ''पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय और कॉलेज संशोधन विधेयक, 2026'' को 10 सितंबर को विधानसभा के विशेष सत्र में पारित किया गया था, जो सरकार को एक राज्य विश्वविद्यालय से दूसरे में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का ट्रांसफर करने का अधिकार देता है। पूर्व उच्च शिक्षा सचिव जवाहर सरकार, पूर्व कुलपति ए.एच. राजासाब और कई अन्य शिक्षाविदों ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सीधा हमला और प्रगतिशील सोच को दबाने की साजिश करार दिया है।
ट्रांसफर बिल पर शिक्षक संगठनों का विरोध
विभिन्न शिक्षक संगठनों के दिग्गजों ने इस नए कानून की कड़ी आलोचना करते हुए इसे शिक्षकों को दंडित करने और डर का माहौल पैदा करने वाला बताया है। JNUTA के अध्यक्ष सैयद अख्तर हुसैन और ABUTA के जनरल सेक्रेटरी गौतम माइती ने चेतावनी दी है कि ट्रांसफर के डर से शिक्षक स्वतंत्र रूप से अपनी राय रखने से हिचकिचाएंगे, जिससे शिक्षा, रिसर्च, क्रिएटिविटी और इनोवेशन पर बुरा असर पड़ेगा। इसी कड़ी में WBCUTA के जनरल सेक्रेटरी निलय कुमार साहा ने घोषणा की है कि शिक्षक संगठन मिलकर इस विवादास्पद बिल को अदालत में चुनौती देंगे और राज्यभर में अपना आंदोलन जारी रखेंगे। जादवपुर और कलकत्ता यूनिवर्सिटी समेत देश भर के कई शिक्षक संगठनों ने इस कानून के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी स्तर पर कड़ा संघर्ष करने का संकल्प लिया है।