

कोलकाता : मणिपुर के जिरीबाम जिले की 75 वर्षीय थोकचोम अमुतोंबी देवी ने इससे पहले कभी कोलकाता नहीं देखा था, लेकिन दो साल पहले कुकी-मैतेई जातीय हिंसा के दौरान उन्होंने अपने इलाके में आगजनी, विस्थापन और डर का मंजर देखा हैं। 40 वर्षीय सलाम सरोदा देवी आज भी उन दिनों के खून और आंसुओं को भूल नहीं पातीं। लेकिन अब ये दोनों महिलाएं और उनके साथ 13 अन्य साथी दर्द की कहानी नहीं, बल्कि शांति और सद्भाव का संदेश लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में घूम रही हैं।
असम राइफल्स के सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत आयोजित नेशनल इंटीग्रेशन टूर में 'जिरी इमा मीरा पैबी अपुनबा लुप' (JIMPAL) की 15 महिला सदस्य कोलकाता पहुंचीं। यह यात्रा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच समझ बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। कोलकाता प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विक्टोरिया मेमोरियल और ईको पार्क जैसे प्रमुख स्थलों का दौरा किया, जहां सात अजूबों की प्रतिकृतियां भी हैं। इन जगहों ने उन्हें भारत की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखायी।
अमुतोंबी देवी कहती हैं, हमने बहुत दर्द देखा है, अब चाहती हैं कि हमारी अगली पीढ़ी सिर्फ शांति देखे। सरोदा देवी जोड़ती हैं, महिलाएं सिर्फ पीड़ित नहीं, बदलाव की वाहक भी हो सकती हैं। कोलकाता के बाद यह दल भुवनेश्वर जाएगा। 11 से 22 जनवरी असम और बंगाल होते हुए मणिपुर से ओडिशा तक उनकी यह यात्रा सिर्फ शहरों का भ्रमण नहीं, बल्कि टूटे भरोसे को जोड़ने और यह दिखाने की कोशिश है कि हिंसा के बाद भी इंसानियत और एकता की राह चुनी जा सकती है।