नंदीग्राम में चुनाव से पहले 108 नेताओं पर गिरफ्तारी की तलवार

चुनाव से पहले वारंट की तामीली पर उठे सवाल
नंदीग्राम में चुनाव से पहले 108 नेताओं पर गिरफ्तारी की तलवार
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सन्मार्ग संवाददाता

नंदीग्राम : नंदीग्राम में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण होता दिखाई दे रहा है। क्षेत्र के सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा—दोनों ही दलों के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ लंबे समय से लंबित गिरफ्तारी वारंटों ने चुनावी समीकरणों में नई हलचल पैदा कर दी है। सूत्रों के अनुसार, कुल 108 लोगों पर जारी ये वारंट मुख्य रूप से नंदीग्राम भूमि आंदोलन के काल से जुड़े हैं, जब तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने तृणमूल समर्थित आंदोलनकारियों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए थे।

समय बीतने के साथ और सत्ता परिवर्तन के बाद, नंदीग्राम की राजनीतिक धरातल में बड़ा बदलाव आया। इलाके के लोगों का झुकाव तृणमूल और भाजपा के बीच बंट गया, मगर पुराने मुकदमे आज भी कई नेताओं के सिर पर तलवार की तरह लटक रहे हैं। जिन लोगों के खिलाफ अब गिरफ्तारी वारंट लंबित हैं, उनमें तृणमूल और भाजपा दोनों के ही प्रमुख स्थानीय नेता शामिल हैं। सूची में भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति के अध्यक्ष शेख सुफियान और अबू ताहिर जैसे नामों के अलावा तृणमूल के स्वदेश रंजन दास, शेख शहाबुद्दीन और शेख सयूम काजी के नाम भी दर्ज हैं। दूसरी ओर भाजपा के स्वदेश दास अधिकारी, अशोक करण, गोवर्धन दास और सरोज भुइयाँ सहित कई स्थानीय नेताओं पर भी वारंट जारी हैं।

राजनीतिक हलकों में यह दावा जोर पकड़ रहा है कि चुनाव आयोग चुनाव घोषणा के बाद ऐसे वारंटों की तामीली तेज करने के निर्देश देता है। इस कारण यह आशंका बढ़ी है कि क्या चुनाव से पहले इतने नेताओं को हिरासत में लिया जा सकता है, और यदि लिया गया तो इससे चुनावी प्रक्रिया पर कैसा प्रभाव पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि जिन अभियुक्त नेताओं ने अग्रिम जमानत के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय में आवेदन किया था, उनकी याचिकाएँ खारिज हो चुकी हैं, जिससे संकट और गहरा गया है।

तृणमूल नेता और नंदीग्राम-1 के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष स्वदेश रंजन दास का कहना है कि भूमि आंदोलन के दौरान सभी ने मिलकर विरोध किया था, और उसके बाद कई मामले वापस भी ले लिए गए थे, लेकिन भाजपा ने उच्च न्यायालय में मामले फिर से दायर किए, जिसके कारण आज कई नेता कानूनी जटिलताओं में उलझे हैं। स्वदेश ने इस पूरे विवाद के लिए राज्य के विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी पर आरोप लगाया है।

उधर, भाजपा नेता मेघनाद पाल का कहना है कि तृणमूल अपने नेताओं के साथ क्या करती है, यह उनका आंतरिक मामला है, लेकिन भाजपा अपने नेताओं की सुरक्षा और कानूनी सहायता के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।

इन घटनाक्रमों के चलते चुनाव से पहले नंदीग्राम का सियासी तापमान तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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