आंध्र प्रदेश में असम की 20 वर्षीय छात्रा और नृत्यांगना हिमाश्री बोरो की मौत के मामले में न्याय की मांग तेज होने के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को गुवाहाटी के चपैडोंग स्थित उनके आवास पर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उचित जांच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री तथा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने यह भी बताया कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए असम पुलिस के एक महानिरीक्षक (आईजीपी) को आंध्र प्रदेश भेजा गया है। इस घटना ने दूसरे राज्यों की यात्रा करने वाले असम के लोगों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाश्री की मौत को लेकर परिवार के सदस्यों और आम लोगों के मन में कई सवाल और संदेह हैं।
जांच को आगे बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे आवश्यक कदम
उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। असम सरकार की ओर से दूसरे राज्य की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने की पहल को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परिवार से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस मामले की उचित जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना से जुड़े सवालों का जवाब जांच के माध्यम से सामने आना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, असम पुलिस के आईजीपी को आंध्र प्रदेश भेजा गया है, ताकि जांच की प्रगति पर नजर रखी जा सके और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय बनाया जा सके। हिमाश्री की मौत की परिस्थितियों को लेकर परिवार और लोगों में व्याप्त संदेह के बीच राज्य सरकार की यह पहल महत्वपूर्ण है। हालांकि, अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि असम पुलिस के अधिकारी जांच में किस स्तर पर प्रत्यक्ष रूप से शामिल होंगे और दोनों राज्यों की पुलिस के बीच जांच संबंधी जिम्मेदारियों का निर्धारण किस प्रकार किया जाएगा।
एएएसयू ने जिला मुख्यालयों पर निकाला कैंडल मार्च
हिमाश्री बोरो की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) ने रविवार को राज्य के विभिन्न जिलों में कैंडल मार्च निकाला। संगठन ने दोषियों की पहचान और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। एएएसयू के मुख्य सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने बताया कि संगठन के केंद्रीय नेतृत्व के अनुरोध पर राज्यभर में कैंडल मार्च आयोजित किए गए। उन्होंने कहा कि संगठन की प्रमुख मांग हिमाश्री को न्याय दिलाना और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस उपाय करना है। भट्टाचार्य ने मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि हिमाश्री के मामले में गंभीर लापरवाही और खामियां रही हैं। उन्होंने अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग की। एएएसयू की इस पहल के माध्यम से छात्र संगठन ने घटना को केवल एक परिवार की त्रासदी तक सीमित न रखते हुए महिलाओं की सुरक्षा और दूसरे राज्यों में यात्रा करने वाले विद्यार्थियों की संरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दे के रूप में उठाया है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने विशाखापत्तनम गई थीं हिमाश्री
हिमाश्री बोरो गुवाहाटी के बी. बरुआ कॉलेज की 20 वर्षीय छात्रा थीं। वह पढ़ाई के साथ नृत्य से भी जुड़ी हुई थीं। एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए वह एक नृत्य मंडली के साथ आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम गई थीं। कार्यक्रम में भाग लेने के बाद उन्हें असम लौटना था। इसी सिलसिले में उन्होंने छह अक्टूबर को डिब्रूगढ़ जाने वाली विवेक एक्सप्रेस में यात्रा शुरू की थी। लेकिन यात्रा के दौरान वह लापता हो गईं। इसके बाद परिवार और परिचितों की चिंता बढ़ गई। बाद में आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में दुसी और पोंडुरु रेलवे स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक के पास उनका शव बरामद हुआ। शव मिलने की सूचना के बाद उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठने लगे और मामले की विस्तृत जांच की मांग तेज हो गई।
ट्रेन में असहज स्थिति को लेकर जताई थी चिंता
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, परिवार और दोस्तों से संपर्क टूटने से पहले हिमाश्री ने कथित तौर पर ट्रेन के भीड़भाड़ वाले डिब्बे में पुरुषों से घिरे होने को लेकर चिंता जताई थी। उनका यह अंतिम संचार घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, केवल इस संदेश के आधार पर उनकी मौत के कारण या उसमें किसी व्यक्ति की भूमिका के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि यात्रा के दौरान उनके साथ क्या हुआ, वह किन परिस्थितियों में लापता हुईं और रेलवे ट्रैक के पास उनका शव कैसे पहुंचा। इसी वजह से उनके अंतिम संचार, यात्रा के दौरान की गतिविधियों और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। परिवार और आम लोगों की मांग है कि घटना से जुड़े सभी सवालों का जवाब पारदर्शी जांच के जरिए सामने आए।
आंध्र प्रदेश पुलिस की एसआईटी कर रही जांच
हिमाश्री का शव मिलने के बाद आंध्र प्रदेश पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। जांच में फोरेंसिक विशेषज्ञों, डॉग स्क्वॉड और ड्रोन टीमों की मदद ली गई है। जांचकर्ताओं ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है और उन परिस्थितियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है, जिनमें उनकी मौत हुई। जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों और उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण किया जा रहा है। मामले में असम पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी को आंध्र प्रदेश भेजे जाने से दोनों राज्यों के बीच समन्वय बढ़ने की उम्मीद है।
पोस्टमार्टम में शारीरिक और यौन हिंसा से इनकार
आंध्र प्रदेश पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शारीरिक और यौन हिंसा के संकेतों से इनकार किया गया है। हालांकि, इससे हिमाश्री की मौत से जुड़े सभी सवालों का जवाब नहीं मिल जाता। उनकी मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच अभी जारी है। पोस्टमार्टम के निष्कर्षों के साथ-साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और अन्य जांच संबंधी तथ्यों के आधार पर ही मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सकेगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। हिमाश्री बोरो की मौत ने असम में व्यापक चिंता पैदा की है। परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है, जबकि छात्र संगठन और आम लोग मामले की निष्पक्ष जांच तथा महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें एसआईटी की जांच, असम और आंध्र प्रदेश पुलिस के समन्वय तथा उन तथ्यों पर हैं, जिनसे इस मामले की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।