अवैध निर्माण तोड़ने के मामले में पार्षद ना करें दखल : मेयर

अवैध निर्माण तोड़ने के मामले में पार्षद ना करें दखल : मेयर
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सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : अवैध निर्माण तोड़ने के मामले में पार्षदों की कोई भूमिका नहीं है और ना ही वह उसमें दखल दे सकते है। यह कहना है कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम का। शुक्रवार को टॉक टू मेयर कार्यक्रम में अवैध निर्माण को ताेड़ने के दौरान पार्षद के हस्तक्षेप के मामले में सवाल के जवाब में मेयर ने कहा कि जहां से भी अवैध निर्माण की शिकायत मिलेगी केएमसी की ओर से कानून के तहत उसे तोड़ा जायेगा। इस काम के दौरान कोई पार्षद दखलंदाजी नहीं कर सकता है और ना ही इसे रोक सकता है। उन्हें यह मामला केएमसी के इंजीनियरों और अधिकारियों पर छोड़ देना चाहिए। इसके बाद उन्होंने केएमसी के बिल्डिंग विभाग के ​अधिकारी से उक्त इमारत के बारे में पूछा। अधिकारी ने कहा कि तोड़ने का काम बहुत जल्द ही किया जायेगा। हमने तोड़े जाने वाली इमारतों की एक सूची तैयार की है और यह इमारत सूची में है। पिछली बार हमने इसका एक हिस्सा तोड़ दिया था, लेकिन पार्षद द्वारा विरोध करने के कारण हमें पीछे हटना पड़ा था। गौरतलब हो कि गत जून महीने में जब निगम की ओर से वार्ड नंबर 102 के बाघाजतिन के चित्तरंजन कॉलोनी इलाके में एक अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का काम किया जाना था तो आरोप है कि उस दौरान स्थानीय पार्षद की ओर से इस काम में दखल दिया गया, जिस कारण निगम के अधिकारी और पुलिस को बिना काम किये ही लौटना पड़ा। मालूम हो कि उस मकान को दो मंजिले तक बनाने की योजना थी, लेकिन उसे तीन मंजिला बना दिया गया था जिस कारण नगर निगम के कर्मचारी उस हिस्से को तोड़ने के लिए वहां पहुंचे थे। निगम सूत्रों के मुताबिक एक बार अवैध निर्माण के बारे में शिकायत दर्ज होने पर निगम की ओर से उस मकान मालिक को एक नोटिस भेजी जाती है और उसे सुनवाई में उपस्थित होने के लिए कहा जाता है। इस दौरान शिकायतकर्ता और मालिक की बातों को सुना जाता है और दस्तावेजों की जांच की जाती है। शिकायत की सत्यता की जांच करने के लिए सिविक इंजीनियर इमारत का निरीक्षण करते हैं। एक अधिकारी ने कहा कि ध्वस्त करने पर फैसला दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही लिया जाता है। पिछले साल केएमसी ने लगभग 300 इमारतों पर हथौड़ा चलाया था।

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