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तेजाब हमला पीड़ितों को रेल किराये में रियायत पर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश
नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से कहा कि तेजाब हमले के पीड़ितों को रेल यात्रा में रियायत देने के लिए तैयार की जा रही नीति में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। न्यायालय का कहना है कि ऐसी व्यवस्था पीड़ितों को उपचार के लिए उन अस्पतालों तक पहुंचने में मदद कर सकती है, जहां बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले पीठ ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से तैयार किए जा रहे नीति मसौदे पर विचार किया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
इलाज के लिए बेहतर अस्पतालों तक पहुंच का मुद्दा
सुनवाई के दौरान यह पहलू सामने आया कि तेजाब हमले के पीड़ितों को अक्सर लंबे समय तक उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता होती है। कई मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उनके निवास स्थान से दूर उपलब्ध होती हैं। इसी संदर्भ में रेल यात्रा में रियायत को केवल आर्थिक सहायता के रूप में नहीं, बल्कि उपचार तक पहुंच आसान बनाने वाली सुविधा के तौर पर देखा जा रहा है। न्यायालय ने कहा कि नीति बनाते समय इस पहलू को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
केंद्र सरकार ने तैयार किया नीति का मसौदा
पीठ को बताया गया कि केंद्र सरकार ने संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद रेल यात्रा में रियायत से जुड़ी नीति का एक मसौदा तैयार किया है। इस प्रक्रिया में याचिकाकर्ता एनजीओ अतिजीवन सोसाइटी समेत अन्य संबंधित पक्षों से भी विचार-विमर्श किया गया है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मसौदे पर संबंधित स्तर पर विचार किया जा रहा है।
सामाजिक न्याय मंत्रालय के विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को भी अंतिम नीति तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। न्यायालय के निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेजाब हमले के पीड़ितों की स्थिति और उनकी विशेष आवश्यकताओं पर नीति बनाते समय संबंधित विशेषज्ञ विभाग की राय भी शामिल हो।
अगली सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध
पीठ ने इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध कर दिया है। इसका अर्थ है कि फिलहाल न्यायालय ने अंतिम नीति पर अपना निष्कर्ष नहीं दिया है और केंद्र द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्ताव तथा संबंधित विभाग की भागीदारी के बाद मामले में आगे विचार किया जाएगा।
13 अगस्त को केंद्र ने जताई थी सैद्धांतिक सहमति
इस मामले की पिछली सुनवाई में, 13 अगस्त को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह तेजाब हमले के पीड़ितों को रेल किराये में रियायत देने के लिए नीति तैयार करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है। उस समय न्यायालय ने रेल मंत्रालय से इस विषय में उदारतापूर्वक रियायत देने के प्रस्ताव पर विचार करने को कहा था।
6 सप्ताह में मसौदा दाखिल करने का निर्देश
पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से कहा था कि 6 सप्ताह के भीतर प्रस्तावित नीति का मसौदा अदालत के रिकॉर्ड में दाखिल किया जाए। इसके बाद केंद्र सरकार ने संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया आगे बढ़ाई और नीति का मसौदा तैयार किया।
‘मरीज श्रेणी’ के तहत सुविधा देने का प्रस्ताव
केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि सरकार तेजाब हमले के पीड़ितों को रेल किराये में रियायत देने की सुविधा को ‘मरीज श्रेणी’ के तहत देने का प्रस्ताव कर रही है। इस प्रस्ताव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकार तेजाब हमले के पीड़ितों के लिए रेलवे रियायत की व्यवस्था करना चाहती है, लेकिन इसके लिए उन्हें रेलवे की मौजूदा दिव्यांग श्रेणी में शामिल करना आवश्यक नहीं मान रही है।
दिव्यांग श्रेणी को लेकर केंद्र की आपत्ति
केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष यह भी बताया कि तेजाब हमले के पीड़ितों को दिव्यांगजन की एक अलग श्रेणी में रखने को लेकर कुछ आपत्तियां हैं। सरकार का तर्क है कि वर्तमान में संबंधित दिव्यांग श्रेणी के अन्य लोगों को रेलवे में यात्रा रियायत उपलब्ध नहीं है। इसलिए तेजाब हमले के पीड़ितों को उसी ढांचे में शामिल करने से नीति और मौजूदा रेलवे रियायत व्यवस्था के बीच कुछ व्यावहारिक एवं नीतिगत सवाल पैदा हो सकते हैं।
विवाद का केंद्र: अलग श्रेणी या मरीज श्रेणी?
मामले में मूल प्रश्न केवल यह नहीं है कि तेजाब हमले के पीड़ितों को रेल किराये में रियायत दी जाए या नहीं, बल्कि यह भी है कि रियायत देने के लिए उन्हें किस श्रेणी में रखा जाए। एक ओर, तेजाब हमले से प्रभावित लोगों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए उनके लिए अलग व्यवस्था बनाने का विचार है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने अदालत को बताया है कि उन्हें दिव्यांगजन की अलग श्रेणी में रखने से मौजूदा रेलवे रियायत व्यवस्था से जुड़े प्रश्न उठ सकते हैं।इसीलिए सरकार का प्रस्ताव है कि सुविधा को ‘मरीज श्रेणी’ के अंतर्गत रखा जाए।
न्यायालय के निर्देश का व्यापक संदर्भ
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह मामला तेजाब हमले से बचे लोगों के उपचार, पुनर्वास और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच से जुड़े व्यापक मुद्दे के संदर्भ में आया है। रेल यात्रा में रियायत का उद्देश्य ऐसे पीड़ितों के लिए उपचार के दौरान आने-जाने का खर्च कम करना हो सकता है, विशेषकर तब जब उन्हें अपने शहर या जिले से बाहर किसी विशेषज्ञ अस्पताल में जाना पड़े। न्यायालय ने इसी संदर्भ में नीति तैयार करने की प्रक्रिया में संबंधित सरकारी विभागों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना है।
अब आगे क्या होगा?
मामले में आगे की प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार की तैयार नीति पर संबंधित विभागों की राय ली जाएगी। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की भागीदारी के बाद नीति के अंतिम स्वरूप पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
केंद्र सरकार सैद्धांतिक रूप से रेल रियायत देने पर सहमत है।नीति का एक मसौदा तैयार किया जा चुका है।केंद्र इसे ‘मरीज श्रेणी’ के तहत देने का प्रस्ताव कर रहा है।तेजाब हमले के पीड़ितों को अलग दिव्यांग श्रेणी में रखने को लेकर केंद्र ने आपत्तियां बताई हैं।सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को नीति निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल करने को कहा है।मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

