

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने सोमवार को भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता बिल को विधानसभा के पटल पर रख दिया। सरकार के इस मास्टरस्ट्रोक ने विपक्ष के खेमे में खलबली मचा दी है। एक ओर जहां सत्ता पक्ष इसे प्रदेश के इतिहास में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बता रहा है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के मुताबिक सरकार इस बिल को सप्लीमेंट्री सूची के जरिए लाई है। विपक्ष की ओर से आक्रामक तेवर दिखाए जाने और ज़ोरदार विरोध-प्रदर्शन के बावजूद, विधानसभा अध्यक्ष ने बिल को रिकॉर्ड पर ले लिया है। मध्य प्रदेश में UCC बिल के पास होने के बाद प्रदेश में विवाह, तलाक, पैतृक संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। जानते हैं मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) 2026 में क्या-क्या है-
मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता बिल 2026 में क्या-क्या है ?
UCC अनुसूचित जनजातियों (ST), संरक्षित पारंपरिक समुदायों तथा घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजातियों पर लागू नहीं होगा ।
बहु विवाह और तीन तलाक पर पूर्ण प्रतिबंध मसौदे के अनुसार सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही विवाह वैध होगा। पुरुषों की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है।
मौखिक तलाक या किसी अनौपचारिक पंचायत के फैसले को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी। तलाक केवल कानून में निर्धारित आधारों पर ही संभव होगा।
प्रस्तावित संहिता में तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा विवाह के लिए निकाह हलाला करवाने या बढ़ावा देने को अपराध माना गया है।
यूसीसी के तहत विवाह और तलाक दोनों का पंजीयन अनिवार्य होगा।
मसौदे में ‘अवैध संतान’ की अवधारणा समाप्त कर दी गई है। विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार मिलेंगे।
UCC मसौदे में बेटा और बेटी दोनों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया है, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। माता और पिता दोनों को भी प्रथम श्रेणी का उत्तराधिकारी माना गया है।
हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी व्यक्ति उत्तराधिकार का अधिकार खो देगा। यदि कोई कानूनी वारिस नहीं होगा तो संपत्ति राज्य के पास जाएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के समक्ष घोषणा दर्ज करानी होगी। दोनों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना आवश्यक होगा और वे पहले से विवाहित नहीं होने चाहिए। नियमों के उल्लंघन पर सजा और जुर्माना- बिना पंजीयन एक महीने से अधिक लिव-इन रहने पर 3 महीने तक जेल या ₹10,000 तक जुर्माना। गलत जानकारी देने पर- 3 महीने तक जेल या ₹25,000 तक जुर्माना। नोटिस के बावजूद जानकारी न देने पर: 6 महीने तक जेल या ₹25,000 तक जुर्माना
यदि कोई व्यक्ति पहले से विवाहित है और लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान। पुरुष अगर अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़कर जाता है, तो उसे महिला को भरण-पोषण देना पड़ सकता है।