सफलता की अनोखी मिसाल : एक किसान के चार बच्चों ने पहनी खाकी वर्दी

Success
सफलता की अनोखी मिसाल
Published on

हरियाणा के भिवानी जिले के सण्डवा गांव के एक किसान परिवार ने सफलता की एक ऐसी गौरवशाली कहानी लिखी है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। किसान अत्तर सिंह और उनकी धर्मपत्नी राजवंती देवी के चार बेटे-बेटियों ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर पुलिस सेवा में स्थान बनाकर इतिहास रच दिया है।

अभावों को पछाड़कर सफलता की ऊंचाइयां

माता-पिता के अधिक पढ़े-लिखे न होने के बावजूद, उन्होंने बच्चों की शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं आने दी। चारों भाई-बहनों ने गांव के स्कूल से अपनी नींव मजबूत की और कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि लगन और सही रणनीति हो, तो बड़े शहरों में कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ती।

चारों भाई-बहनों का सेवा-योगदान

सुदेश (सबसे बड़ी बेटी): वर्ष 2010 में चंडीगढ़ पुलिस में भर्ती होकर परिवार में पहली सरकारी नौकरी का मार्ग प्रशस्त किया।

उर्मिला : कोविड काल की चुनौतियों के बीच रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में चयनित हुईं और वर्तमान में अंबाला में तैनात हैं।

मोनिका : दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2024 में सफलता हासिल कर परिवार का मान बढ़ाया।

अंकित (सबसे छोटा भाई): अपनी बहनों से प्रेरणा लेकर दूसरे प्रयास में हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल बने और वर्तमान में रोहतक में कार्यरत हैं।

एक यादगार पल

इस परिवार की खुशियाँ तब दोगुनी हो गईं जब 30-31 मार्च 2026 को घर पर आयोजित एक कार्यक्रम में ये चारों भाई-बहन पहली बार एक साथ अपनी 'खाकी वर्दी' में शामिल हुए। यह दृश्य न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे सण्डवा गाँव के लिए एक अविस्मरणीय पल बन गया।

सफलता का मूलमंत्र

परिवार के पाँचवें सदस्य श्याम सुंदर (जो एक शिक्षक हैं) के अनुसार, इस सफलता का आधार 'निरंतर अनुशासन' और 'एक समान रणनीति' रही। माता-पिता द्वारा बच्चों को दी गई सीख-"मेहनत में कोई कमी नहीं रखनी है" यही इस परिवार का सबसे बड़ा संबल रही। यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक मार्गदर्शिका है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों की खाकी वर्दी हासिल करना चाहते हैं।

Google पर संवाद सर्च बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in