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इंफाल : मणिपुर की जीवनरेखा माने जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-37 (एनएच-37) पर 1,300 करोड़ रुपये की लागत से चौड़ीकरण और उन्नयन का कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन मानसून की पहली ही बारिश ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की चुनौतियों को फिर उजागर कर दिया है। कई स्थानों पर भूस्खलन, सड़क धंसने, कीचड़ और जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है, जिससे इम्फाल और जिरीबाम के बीच सफर एक बार फिर लंबा और मुश्किल बन गया है।
इंफाल को जोड़ता है सिलचर से
224 किलोमीटर लंबा एनएच-37 इम्फाल को जिरीबाम के रास्ते असम के सिलचर से जोड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में एनएच-2 पर बार-बार अवरोध और सुरक्षा संबंधी समस्याओं के कारण यह मार्ग मणिपुर तक खाद्यान्न, ईंधन, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता बन गया है। इसी रणनीतिक महत्व को देखते हुए 2022 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 203 किलोमीटर सड़क को ऑल-वेदर कॉरिडोर के रूप में विकसित करने के लिए 1,300 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर की थी।
बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
परियोजना के तहत कई हिस्सों में सड़क चौड़ीकरण और नए आरसीसी पुलों का निर्माण हुआ, जिससे इम्फाल-जिरीबाम की यात्रा छह घंटे से घटकर चार-पांच घंटे रह गई थी। लेकिन मानसून शुरू होते ही भूस्खलन, क्षतिग्रस्त सड़कें, जाम और कीचड़ के कारण यही सफर अब सात से आठ घंटे तक पहुंच रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि बारिश होते ही सड़क की स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
निर्माण एजेंसी का पक्ष
एनएचआईडीसीएल का कहना है कि 2023 के बाद इस मार्ग पर यातायात कई गुना बढ़ गया है और प्रतिदिन लगभग एक हजार वाहन गुजर रहे हैं, जिससे निर्माणाधीन हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। एजेंसी के अनुसार, भूमि अधिग्रहण, प्राकृतिक आपदाओं और स्थानीय विरोध के कारण भी काम प्रभावित हुआ। फिलहाल परियोजना के सात में से दो पैकेज पूरे हो चुके हैं, जबकि बाकी में 85 से 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। एजेंसी का दावा है कि संवेदनशील हिस्सों की मरम्मत जुलाई के दौरान पूरी कर दी जाएगी और पूरी परियोजना दिसंबर 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य है।