विनेश की वापसी का सपना टूटा

पेरिस ओलंपिक 2024 फाइनल के दिन अयोग्य करार दिये जाने के बाद पहली बार मैट पर उतरी विनेश विवादों, नाटकीयता और निशु कुमारी के खिलाफ कड़ा मुकाबला जीतकर सेमीफाइनल में पहुंची थी
विनेश की वापसी का सपना टूटा
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नयी दिल्ली : तालियों की गूंज, नाटकीयता से भरे घटनाक्रम और जज्बात के सैलाब के बीच परीकथा सरीखी वापसी की विनेश फोगाट की उम्मीदों पर पानी फिर गया। जब शनिवार को एशियाई खेल चयन ट्रायल के 53 किलोवर्ग के सेमीफाइनल में उन्हें मीनाक्षी गोयत ने 6-4 से हरा दिया। पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद राष्ट्रीय टीम में लौटने से विनेश दो जीत पीछे रह गई।स्टेडियम से रवाना होते समय विनेश ने इतना ही कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि मैं असफल हुई हूं। मैं पूरी व्यवस्था से लड़ रही थी। हमें हर अंक के लिये लड़ना पड़ा। मेरे साथ सही बर्ताव नहीं हुआ। मुझे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों से कोई द्वेष नहीं है। उन्होंने भी मेरे खिलाफ खेलने का सपना देखा था। मैं वापिस आऊंगी।’

पेरिस ओलंपिक 2024 फाइनल के दिन अयोग्य करार दिये जाने के बाद पहली बार मैट पर उतरी विनेश विवादों, नाटकीयता और निशु कुमारी के खिलाफ कड़ा मुकाबला जीतकर सेमीफाइनल में पहुंची थी। लेकिन एशियाई चैम्पियनशिप रजत पदक विजेता मीनाक्षी के खिलाफ उनकी ऊर्जा खत्म हो गई। विनेश के मैट पर उतरने से पहले भी काफी नाटकीय घटनाक्रम रहा। आधिकारिक वजन-माप के दौरान दो बार की विश्व चैम्पियनशिप पदक विजेता को सूचित किया गया कि उन्हें केवल 50 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी जाएगी, क्योंकि उन्होंने पेरिस ओलंपिक सहित अपनी पिछली चार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में इसी भार वर्ग में भाग लिया था।

विनेश ने इस निर्णय पर कड़ा विरोध जताया और आरोप लगाया कि उन्हें अपनी पसंद के भार वर्ग में उतरने से रोककर महासंघ उनके साथ भेदभाव कर रहा है। मौके पर मौजूद सूत्रों के अनुसार विवाद बढ़ने के बाद डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह ने हस्तक्षेप किया और विनेश को 53 किलोग्राम वर्ग के ट्रायल में भी भाग लेने की अनुमति देने का फैसला किया। इसके बाद विनेश का वजन 53.9 किलोग्राम दर्ज किया गया और उन्हें 53 किलोग्राम वर्ग के ड्रॉ में शामिल कर लिया गया। पहले मुकाबले में विनेश ने ज्योति को आसानी से 7-1 से हराया। इसके बाद निशु को हराने में उन्हें काफी पसीना बहाना पड़ा। पहले ही पीरियड में चार अंक की बढत लेकर उन्होंने विनेश को लगभग चित ही कर दिया था लेकिन विनेश संभल गई।

यह मुकाबला भावनाओं से भरा था लेकिन इसमें कई चुनौतियां और स्क्रीन की तकनीकी खराबी जैसी दिक्कतें भी आईं। इसके चलते मिले लंबे ब्रेक ने विनेश को राहत दी। विनेश ने दूसरे पीरियड में शानदार वापसी करते हुए चार अंक बनाये और निशु को मैट पर पटक दिया । विनेश ने निशु को अपनी जकड़ में ले लिया। उनके कोच कॉर्नर में बैठे उनके पति सोमबीर राठी और समर्थकों ने ‘फॉल (प्रतिद्वंद्वी को इस तरह पटकना कि उसके कंधे कुछ सेकंड मैट पर टिके रहें) की मांग की । रैफरी के फैसले को चुनौती दी गई और यह फैसला दिया गया कि रैफरी ने गलत सीटी बजाई थी लेकिन विनेश को ‘पिन’ का नतीजा नहीं दिया गया । निशु को जमीन पर लेटा दिया गया हालांकि वह इसका फायदा नहीं उठा सकी। दो अंक और लेकर विनेश ने 6-5 की बढत बना ली लेकिन निशु ने स्कोर 6-6 कर दिया।

निशु ने विनेश को गिराने की कोशिश की लेकिन उन्हें अंक नहीं मिले। उनके कोच ने फैसले को चुनौती दी लेकिन नाकाम रहे। सेमीफाइनल में मीनाक्षी के खिलाफ वह लय कायम ही नहीं रख सकी और 4-6 से हार गई। ट्रायल की तैयारी के दौरान मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में विनेश ने कहा कि वह अभी कम से कम दो वर्षों तक प्रतिस्पर्धी कुश्ती जारी रखने के इरादे से मैदान में उतरी हैं। उन्होंने कहा था, ‘मैं यहां कम से कम दो साल तक रहूंगी।’ इससे पेरिस में मिले जख्मों के बावजूद कुश्ती में वापसी की उनकी मानसिक दृढता का पता चलता है।

ट्रायल में भागीदारी को लेकर डब्ल्यूएफआई से लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वह मैट पर उतरी थीं। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने डब्ल्यूएफआई को निर्देश दिया था कि विनेश को एक 'प्रतिष्ठित खिलाड़ी' के रूप में मान्यता देते हुए एशियाई खेलों के चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दी जाए। शनिवार को पहले दो मुकाबलों तक खचाखच भरे हॉल में तालियों का शोर कह रहा था कि विनेश की वापसी हो सकती है लेकिन सांझ ढलने तक सेमीफाइनल की हार ने भारत की इस होनहार पहलवान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया । चेहरे पर हार का दर्द और जुबां पर वापसी का संकल्प लिये विनेश को अब अपने कुश्ती कैरियर का नया अध्याय लिखने के लिये लंबा सफर तय करना होगा।

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