'नीरज से भी बेहतर करने की कोशिश करना गलती थी'

राष्ट्रमंडल फाइनल में 81.56 मीटर के थ्रो के बाद रोहित यादव ने माना, रमेश पथिरागे और नीरज चोपड़ा से आगे निकलने की जल्दबाज़ी ने पदक की दौड़ में उन्हें पीछे धकेल दिया
'नीरज से भी बेहतर करने की कोशिश करना गलती थी'
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नयी दिल्ली : भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी रोहित यादव ने सोमवार को स्वीकार किया कि राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में श्रीलंका के स्वर्ण पदक विजेता रमेश पथिरागे के बड़े थ्रो का पीछा करना और नीरज चोपड़ा से भी बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करना गलती थी। इस 27 वर्षीय खिलाड़ी ने 31 जुलाई को पुरुषों के भाला फेंक फाइनल में 81.56 मीटर के थ्रो के साथ 7वां स्थान हासिल किया।

पथिरागे ने 89.75 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा (85.83 मीटर) और यशवीर सिंह (85.41 मीटर) ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए। यादव ने कहा कि दूसरे प्रयास में 81.56 मीटर का थ्रो करने के बाद उन्हें लगा कि वह पदक जीतने की अच्छी स्थिति में हैं, जिसके बाद उन्होंने अपने शेष चार प्रयासों में सब कुछ झोंक देने का फैसला किया। सोमवार को ग्लास्गो से लौटने के बाद रोहित ने कहा, ‘मेरा दूसरा थ्रो लगभग 81 मीटर (81.56 मीटर) था और मुझे लगा कि मैं कम से कम शीर्ष आठ में तो जगह बना ही लूंगा।

उसके बाद मैंने इसके बाद अपनी पूरी ताकत लगाने का फैसला किया।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे लगा कि मैं रमेश के थ्रो की बराबरी कर सकता हूं। मैं सोच रहा था कि मैं उस मुकाम को हासिल कर सकता हूं जहां तक उस दिन नीरज भी नहीं पहुंच पाया था। इसी सोच के कारण मैं थोड़ा अति आत्मविश्वासी हो गया था।’ यादव अपने शेष प्रयासों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सके। उनके तीसरे और 5वें प्रयास फाउल रहे, जबकि उन्होंने अपने चौथे और छठे प्रयास में क्रमशः 73.70 मीटर और 79.55 मीटर का थ्रो किया।

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