

नयी दिल्ली : भारत के चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी की बेहतरीन युगल जोड़ी के आठवें और नौवें BWF विश्व टूर खिताब के बीच 742 दिन का अंतर रहा है, लेकिन अगर कोई उन्हें अनिरंतर कहने की सोचेगा भी तो उसका जवाब शरीर पर सीधे किए गए स्मैश जैसा होगा।सिंगापुर ओपन जीतने वाली पहली भारतीय युगल जोड़ी ने रविवार को 73 मिनट चले फाइनल में एक गेम से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए इंडोनेशिया के फजर अल्फियान और मुहम्मद शोहिबुल फिक्री को 18-21, 21-17, 21-16 से हराने में कामयाब रही। यह दुनिया की पूर्व नंबर एक जोड़ी का तीसरा सुपर 750 खिताब था जो चोटों, चार फाइनल में हार और आठ सेमीफाइनल से बाहर होने जैसे मुश्किल दौर के बाद आया है।
चिराग ने एक वर्चुअल मीडिया बातचीत के दौरान कहा, ‘मैं इसे अनिरंतर नहीं कहूंगा। मुझे लगता है कि इसके उलट, हम काफी निरंतर थे। दुनिया की नंबर तीन जोड़ी को अनिरंतर कहना, मुझे लगता है कि नंबर एक के अलावा बाकी सबको बैडमिंटन खेलना छोड़ देना चाहिए।’ भारत की प्रमुख पुरुष युगल जोड़ी के लिए पिछले दो साल उतार-चढ़ाव वाले प्रदर्शन के बारे में कम, बल्कि चोटों से निपटने, लंबे ब्रेक और बैडमिंटन की सबसे जबरदस्त प्रतिस्पर्धी विधाओं में से एक में अपनी लय वापस पाने की चुनौती के बारे में अधिक थे। लेकिन चिराग ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि यह जोड़ी अनिरंतर हो गई थी।
उन्होंने कहा, ‘हर कोई जीतने के लिए ही कोर्ट में उतरता है। हमारे साथ भी ऐसा ही था। हम भी कोर्ट में जाकर खिताब जीतना चाहते थे। लेकिन ऐसा नहीं था कि हम जीत नहीं पा रहे थे और ना ही ऐसा था कि हम खराब खेल रहे थे या कुछ और। बस कभी-कभी किस्मत हमारे साथ नहीं होती थी।’ जून 2025 में एक समय ऐसा भी आया था, जब सर्किट से लंबे समय तक बाहर रहने के कारण यह जोड़ी फिसलकर दुनिया की 27वीं रैंकिंग पर पहुंच गई थी। फिर भी, नवंबर तक वे फिर से शीर्ष तीन में वापसी करने में कामयाब रहे। चिराग का मानना है कि यह उनकी निरंतरता और काबिलियत का ही सबूत है।
चिराग ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि किसी ने भी ऐसा होते देखा होगा कि चोटों से उबरने के बाद कोई 27वें नंबर से सीधे तीसरे नंबर पर वापसी कर ले।’ सात्विक ने माना कि पिछले दो साल में उनकी यात्रा में चोटें सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही हैं। उन्होंने कहा, ‘यह खेल का ही एक हिस्सा है। ऐसा नहीं है कि किसी को चोट नहीं लगेगी।’ उन्होंने कहा, ‘आपको अपने शरीर का ध्यान रखना होता है, खासकर मुझे मेरे शरीर का क्योंकि मेरा खेल ज्यादा आक्रामक है। कभी-कभी, आप बड़े टूर्नामेंट से चूकते रहेंगे, इसे भूलकर सही समय पर अपना शत प्रतिशत देने पर ध्यान दें।’
इन मुश्किलों के बावजूद इस जोड़ी ने कभी अपना विश्वास नहीं खोया, खासकर बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी जब उन्हें कोई पुरस्कार नहीं मिला। उन्होंने कहा, ‘हम वही चीजें करते आ रहे हैं। लेकिन कल का दिन हमारा था। किस्मत हमारे साथ थी। बड़े टूर्नामेंट में भी, हमने बहुत-बहुत अच्छा खेला, लेकिन हमें नतीजा नहीं मिला। उतार-चढ़ाव तो हमेशा आते रहते हैं।’ सिंगापुर ओपन में मिली यह जीत सात्विक और चिराग द्वारा 2026 थॉमस कप में भारत के कांस्य पदक जीतने के बाद बैडमिंटन की उपलब्धियों को उचित पहचान नहीं मिलने पर सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त करने के कुछ हफ्तों के बाद आई है।