कभी सोचा नहीं था कि 7 एशियन गेम्स खेलूंगी : जोशना

अपना 40वां जन्मदिन मनाने के महज 10 दिन बाद जोशना ने वेलावन सेंथिलकुमार के साथ मिलकर मौजूदा एशियाई खेलों की मिश्रित युगल स्पर्धा के सेमीफाइनल में जगह बनाई और भारत का पदक पक्का किया।
कभी सोचा नहीं था कि 7 एशियन गेम्स खेलूंगी : जोशना
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नागोया : एशियाई खेलों में रिकॉर्ड सात बार हिस्सा लेकर छह पदक जीत चुकीं भारतीय स्क्वॉश स्टार जोशना चिनप्पा अपनी लंबी खेल यात्रा को लेकर खुद भी थोड़ी हैरान हैं, लेकिन अपने करियर पर विराम लगाने की उनकी कोई योजना नहीं है। अपना 40वां जन्मदिन मनाने के महज 10 दिन बाद जोशना ने वेलावन सेंथिलकुमार के साथ मिलकर मौजूदा एशियाई खेलों की मिश्रित युगल स्पर्धा के सेमीफाइनल में जगह बनाई और भारत का पदक पक्का किया। बुसान एशियाई खेलों 2002 में पदार्पण करने वाली जोशना ने साथी स्क्वॉश खिलाड़ी सौरव घोषाल का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।

घोषाल ने पिछले साल संन्यास लिया था और छह बार एशियाई खेलों में हिस्सा लिया था। नियमित अभ्यास, ध्यान और सांस से जुड़े अभ्यासों ने जोशना को फिट और मैदान पर सक्रिय बनाए रखने में मदद की है। जोशना ने कहा, ‘सातवीं बार एशियाई खेलों में हिस्सा लेना मेरे लिए खास अनुभव है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इतनी बार इस प्रतियोगिता में खेल पाऊंगी।’ चेन्नई की इस खिलाड़ी ने बताया, ‘मैं सप्ताह में पांच-छह दिन अलग-अलग सत्रों में रोजाना पांच से छह घंटे अभ्यास करती हूं। मैं खुद को स्वस्थ और फिट रखने तथा भारत के लिए खेलने को सौभाग्य मानती हूं और फिलहाल सिर्फ अगले मुकाबले पर ध्यान देती हूं।’

उन्होंने कहा, ‘फिलहाल मेरा लक्ष्य भारत के लिए खेलना और एशियाई खेलों का आनंद लेना है। मैं भविष्य को लेकर ज्यादा नहीं सोच रही हूं।’ जोशना ने अपनी फिटनेस का श्रेय समर्पित टीम को दिया। उनके साथ फिटनेस ट्रेनर, मनोवैज्ञानिक, कोच और पोषण विशेषज्ञों की टीम काम करती है। इसके अलावा वह नियमित रूप से ध्यान और सांस संबंधी अभ्यास भी करती हैं। मिश्रित युगल का पदक एशियाई खेलों में जोशना का छठा पदक होगा। उनके नाम अब तक दो रजत और तीन कांस्य पदक हैं। उन्होंने 2018 में एकल में कांस्य, 2014 और 2018 में टीम स्पर्धा में रजत तथा 2010 और 2022 में टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीते थे। एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक अभी उनकी उपलब्धियों की सूची में नहीं है।

वह विश्व चैंपियनशिप, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप में विभिन्न स्पर्धाओं में स्वर्ण जीत चुकी हैं। जोशना ने कहा, ‘एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतना बेहद मुश्किल है, क्योंकि एशिया में दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी मौजूद हैं।’ उम्र बढ़ने के साथ प्रशिक्षण में बदलाव के बारे में जोशना ने कहा कि 35 साल की उम्र के बाद उन्हें अपनी ट्रेनिंग में काफी बदलाव करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘उम्र बढ़ने के साथ शरीर पहले की तरह जल्दी रिकवर नहीं करता। आज मैं खुद को युवा दिनों की तुलना में बेहतर महसूस करती हूं। इसके बावजूद आज खेलने के लिए पहले से अधिक मेहनत करनी पड़ती है।’

जोशना ने पिछले साल अक्टूबर में अपना आखिरी पीएसए एकल खिताब जीता था और वह अब भी एकल में खेलना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा, ‘मैं युगल में मुख्य रूप से एशियाई खेलों के दौरान ही खेलती हूं। ये चार साल में एक बार होते हैं।’ लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 में स्क्वॉश पहली बार शामिल होगा। जोशना को उम्मीद है कि कोई भारतीय खिलाड़ी वहां पदक जीतने में सफल होगा। उन्होंने कहा, ‘ओलंपिक में स्क्वॉश का शामिल होना शानदार है और भारत के पास युवा तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का मजबूत समूह है, जो लॉस एंजिलिस में जगह बनाने की क्षमता रखते हैं। अगले दो वर्षों में ये खिलाड़ी और मजबूत होंगे और उनमें से कोई भारत के लिए ओलंपिक पदक जीत सकता है।’

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