नयी दिल्ली : डोपिंग के खिलाफ भारत की लड़ाई को शुक्रवार को बड़ी मजबूती मिली। भाला फेंक के सुपरस्टार नीरज चोपड़ा ने भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के साथ मिलकर इस समस्या के खिलाफ एक जागरूकता अभियान शुरू किया। IOA के CEO रघुराम अय्यर ने घोषणा की कि संस्था ने ‘साफ-सुथरे खेल अभियान’ के लिए नीरज चोपड़ा फाउंडेशन के साथ एक MOU पर हस्ताक्षर किए हैं। दोहा से एक वीडियो संदेश में चोपड़ा ने बताया कि उन्होंने यह पहल क्यों शुरू की। भारत अहमदाबाद में 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने की कोशिश कर रहा है और डोपिंग का खराब रिकॉर्ड देश की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। चोपड़ा ने कहा, ‘मैंने देखा है कि बच्चे बड़े पदक जीतने के लिए डोपिंग के जरिए अपना प्रदर्शन बेहतर करना चाहते हैं।
लेकिन अपनी कहानी से मैं आपको बता सकता हूं कि मुझे ओलंपिक पदक तक पहुंचने में 10 साल लगे।’ उन्होंने कहा, ‘खेलों में कुछ हासिल करने के लिए सब्र की जरूरत होती है। मैं देख रहा हूं कि आज के बच्चों में इसकी कमी है। वे चीजें जल्दी हासिल करना चाहते हैं। एक साल में ही 80 मीटर का लक्ष्य पार करना चाहते हैं। ऐसा करने में पांच साल लगते हैं।’ यह पहल ऐसे समय में की गई है जब भारत पिछले तीन वर्षों से विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) की डोपिंग के सबसे अधिक मामलों वाली सालाना सूची में सबसे ऊपर रहा है। कुछ हफ्ते पहले ‘एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट’ (AIU) ने देश को डोपिंग के मामले में ‘अधिक जोखम वाला’ देश माना था।
हाल ही में भारत दौरे पर आए वाडा अध्यक्ष विटोल्ड बांका ने साफ तौर पर कहा कि भारत में डोपिंग की गंभीर समस्या है, भले ही इसे दूर करने की कोशिशें की जा रही हों। इस पहल का मकसद डोपिंग रोधी नियमों की समझ को बेहतर बनाना, अनजाने में होने वाले डोपिंग उल्लंघनों के जोखिम को कम करना और ‘खेल के हर स्तर पर ईमानदारी और निष्पक्ष खेल की संस्कृति’ को बढ़ावा देना है। अय्यर ने कहा कि यह अभियान अलग-अलग खेलों और उम्र के खिलाड़ियों के लिए ‘साफ-सुथरे खेल’ की जानकारी को अधिक सुगम, समझने लायक और असरदार बनाने के लिए खिलाड़ियों की कहानियों, डिजिटल शिक्षा उपकरण, कार्यशाला और जमीनी स्तर पर जुड़ने वाले कार्यक्रमों का इस्तेमाल करेगा।
चोपड़ा ने अपने संदेश में कहा, ‘अपने सफर के दौरान मैंने सीखा है कि सफलता कभी रातों-रात नहीं मिलती। यह बरसों के अनुशासन, त्याग और लगातार सही काम करने से मिलती है।’ उन्होंने कहा, ‘साफ-सुथरे खेल का मतलब सिर्फ नियम ही नहीं हैं, बल्कि खिलाड़ियों के लिए एक आरामदायक और सुरक्षित माहौल बनाना भी है जहां वे सप्लीमेंट और प्रदर्शन के दबाव के बारे में अपने संदेह दूर कर सकें। यह डोपिंग के खिलाफ एक संवेदनशील पहल हो सकती है।’ खेल मंत्रालय मौजूदा डोपिंग रोधी कानून में बदलाव करके प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति और खरीद को अपराध घोषित करने की योजना बना रहा है जिससे कि इस समस्या से सख्ती से निपटा जा सके। IOA और चोपड़ा की यह संयुक्त पहल पिछले छह महीनों से तैयार की जा रही थी।