

नागोया : भारत के स्टार युगल बैडमिंटन खिलाड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने हाल में चीन मास्टर्स में मिली जीत से आत्मविश्वास हासिल किया है लेकिन उनका मानना है कि उन्हें और उनके जोड़ीदार चिराग शेट्टी को एशियाई खेलों के 10 दिन के कड़े कार्यक्रम के दौरान अपने शरीर पर पड़ने वाले बोझ का प्रबंधन करना होगा। सात्विक और चिराग हांगझोउ में 2023 में जीते युगल स्वर्ण पदक का जापान में बचाव करने उतरेंगे। सात्विक इस बात से वाकिफ हैं कि एशियाई खेल जैसी प्रतियोगिता शरीर पर कितना अधिक दबाव डाल सकती है। चिराग ने यहां मीडिया से बातचीत में कहा, ‘एशियाई खेल थोड़े खास हैं। यह 10 दिन की प्रतियोगिता है जबकि आमतौर पर हम करीब पांच दिन ही खेलते हैं।
इस लंबे टूर्नामेंट के लिए आपको फिट रहना होगा।’ उन्होंने कहा, ‘काफी यात्रा करनी होगी। टीम स्पर्धा के मुकाबलों के दौरान काफी समय बैठकर भी बिताना होगा।’ चिराग ने माना कि प्रतियोगिता की अवधि के अलावा उनके खेल की आक्रामक शैली भी शरीर पर पड़ने वाले दबाव को बढ़ाती है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि हम खुद अपने दुश्मन हैं क्योंकि हम काफी आक्रामक खेल खेलते हैं। लंबे खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते हुए और युगल में तेज रैलियों में शामिल होने के दौरान हमें काफी चोटें लग सकती हैं।’ चिराग ने कहा, ‘अगर हम अच्छी स्थिति में होते तो हम नंबर एक की रैंकिंग पर अधिक समय तक बने रहते। लेकिन हमें कई टूर्नामेंट छोड़ने पड़े क्योंकि हमें लगातार चोटें लगती रहीं।’
गत चैंपियन होने के कारण दबाव के बारे में पूछे जाने पर सात्विक ने कहा, ‘मेरे और चिराग के लिए हर टूर्नामेंट नया होता है। मुझे लगता है कि मैं इन सभी टूर्नामेंट में पहली बार खेल रहा हूं।’ उन्होंने कहा, ‘हम अच्छा प्रदर्शन करना चाहते हैं। हम पदक तालिका में अपना नाम देखना चाहते हैं। लेकिन मेरे और चिराग पर कोई दबाव नहीं है।’ हालांकि इस महीने की शुरुआत में चीन मास्टर्स में मिली जीत ने सात्विक को जापान में लगातार मुकाबलों के दबाव से गुजरने का आत्मविश्वास दिया है। उन्होंने कहा, ‘चीन ओपन में यह अधिकतर शारीरिक स्थिति को समझने के बारे में था क्योंकि रणनीतिक रूप से हम शीर्ष स्तर पर थे। हर दिन लगातार मुकाबले खेलना मेरे लिए अधिक महत्वपूर्ण था। मेरा शरीर इन परिस्थितियों से कैसे निपट रहा है, यह देखना अहम था। इससे मुझे काफी फायदा मिला।’
चीन रवाना होने से पहले कंधे की चोट के लिए व्यापक रिहैबिलिटेशन (चोट से उबरने की प्रक्रिया) से गुजरने वाले सात्विक ने कहा कि उस प्रतियोगिता से उन्हें सकारात्मक संकेत मिले। इससे पहले सात्विक और चिराग की नयी दिल्ली में बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में चुनौती क्वार्टर फाइनल में समाप्त हो गई थी। चौबीस वर्षीय सात्विक ने कहा कि इस प्रतियोगिता ने उन्हें महाद्वीपीय खेलों से पहले अपने शरीर का ध्यान रखने की जरूरत का एहसास कराया। उन्होंने कहा, ‘विश्व चैंपियनशिप ने मुझे काफी आत्मविश्वास दिया क्योंकि मैं अपने शीर्ष खेल के बिना खेल रहा था। मैं क्वार्टर फाइनल में अपने सर्वश्रेष्ठ खेल के बिना उतरा था।’ सात्विक ने कहा, ‘इसके बाद मैंने मानसिक रूप से तय किया कि मुझे अपने शरीर का ध्यान रखना होगा और कोर्ट पर चोट के बारे में ज्यादा नहीं सोचना है।’