

चेन्नई : एक समय था जब झारखंड में क्रिकेट की चर्चा का मुख्य केंद्र महेंद्र सिंह धोनी हुआ करते थे लेकिन इस साल दलीप ट्रॉफी के लिए पूर्वी क्षेत्र की टीम में उसके पांच खिलाड़ी शामिल हैं जिससे पता चलता है कि वह बल्लेबाजी प्रतिभा का नया गढ़ बन गया है। तमिलनाडु के पूर्व बल्लेबाज और राष्ट्रीय चयनकर्ता श्रीधरन शरथ ने पूर्वी क्षेत्र और दक्षिण क्षेत्र के बीच दलीप ट्रॉफी के फाइनल के दौरान कहा, ‘‘झारखंड से कुछ बहुत अच्छे युवा क्रिकेटर आ रहे हैं।’ पूर्वी क्षेत्र की टीम में झारखंड के पांच खिलाड़ी कप्तान ईशान किशन, अनुभवी विराट सिंह, कुमार कुशाग्र, शिखर मोहन और अनुकूल रॉय शामिल हैं। झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) के सचिव सौरभ तिवारी ने कहा, ‘पूर्वी क्षेत्र की टीम में राज्य के पांच खिलाड़ियों के होने से झारखंड क्रिकेट की प्रगति का पता चलता है।
यहां तक की एक और प्रतिभाशाली खिलाड़ी शरणदीप चयन के दावेदार थे।’ पूर्व भारतीय बल्लेबाज और IPL के नियमित खिलाड़ी रहे तिवारी ने कुशाग्र और मोहन की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘मैं कुमार (कुशाग्र) के प्रदर्शन से बहुत प्रभावित हूं। वह युवा हैं, लेकिन बेहद परिपक्व हैं। जहां तक रॉय का सवाल है तो वह हमारे यहां के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं।’ तिवारी ने कहा, ‘मोहन भी काफी प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और उन्होंने घरेलू सत्र में शानदार प्रदर्शन किया। उम्मीद है कि वह इसे आगे भी जारी रखेंगे।’ कुशाग्र ने 2022 में 18 साल की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया था। वह अभी लंबी अवधि के प्रारूप में छह शतकों की मदद से 2000 से अधिक रन बना चुके हैं, जबकि 2025-26 के सत्र में पदार्पण करने वाले मोहन ने 55 की औसत से रन बनाए हैं।
उन्होंने अब तक दो शतक भी लगाए हैं। तिवारी ने कहा, ‘कुशाग्र टीम के लिए हर प्रारूप में बहुत अच्छा योगदान देते हैं। वह बड़े स्कोर बनाने के साथ 40 और 50 रन का योगदान भी देते रहे हैं जो मैच में बहुत बड़ा अंतर पैदा करते हैं।’ झारखंड के लिए सभी प्रारूपों में 413 मैच खेल चुके तिवारी को यह अच्छी तरह पता है कि राज्य की क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें क्या करना होगा। उन्होंने कहा, ‘मैंने झारखंड के लिए विभिन्न आयु वर्गों में 25 साल तक क्रिकेट खेला है। इसलिए मैं उसके क्रिकेट के स्तर को जानता हूं और मुझे पता है कि कहां खामी है और कहां सकारात्मक पहलू हैं।’ तिवारी ने कहा, ‘हम केवल प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं, बल्कि कौशल विकास पर भी ध्यान दे रहे हैं। अगर खिलाड़ी जूनियर क्रिकेट में अपने कौशल को निखार सकते हैं और अगर उनकी तकनीक अच्छी है, तो वह शतक, दोहरा शतक और यहां तक कि तिहरा शतक भी बना सकते हैं।’