

नयी दिल्ली : भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट ने शनिवार को एशियाई खेलों के चयन ट्रायल्स के सेमीफाइनल में मीनाक्षी गोयत से हारकर बाहर होने के बाद कहा कि वह ‘हारी नहीं हैं’ और संकल्प लिया कि वह और भी मजबूती से वापसी करेंगी। महिलाओं के 53 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में मीनाक्षी से 4-6 से हारने के बाद विनेश के पहले शब्द थे, ‘मैं हारी नहीं हूं।’ विश्व चैंपियनशिप की पूर्व पदक विजेता ने कहा, ‘मैं पूरी व्यवस्था से लड़ रही थी। मैं एक तरफ थी और बाकी सब दूसरी तरफ। मैं आज भी गर्व के साथ मैट पर खड़ी हूं।’ उन्होंने ऐलान किया कि मां बनने के बाद मुकाबले में वापसी करके और उस व्यवस्था के खिलाफ खड़े होकर उन्होंने पहले ही जीत हासिल कर ली है जिसने उनके मुताबिक उन्हें कुश्ती से दूर रखने की हर मुमकिन कोशिश की थी।
हारने के कुछ ही मिनटों बाद विनेश ने कुश्ती प्रशासन पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और उनके पक्ष में अदालत के आदेशों के बावजूद उन्हें कुश्ती में लौटने से रोकने की कोशिशों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘वे मुझे मैट पर लौटने से रोकना चाहते थे, लेकिन मैं फिर से यहां खड़ी हूं। इन 10 महीनों में मैंने जो कुछ भी हासिल किया है, उस पर मुझे गर्व है।’ विनेश ने यह बात भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के साथ अपनी लंबे समय से चल रही लड़ाई के संदर्भ में कही। उन्होंने कहा, ‘मुझे पता है कि यह व्यवस्था मेरे लिए मुश्किलें खड़ी करती रहेगी लेकिन मुझे उम्मीद है कि कड़ी मेहनत से मैं व्यवस्था को पीछे छोड़कर आगे बढ़ सकती हूं।’
उन्होंने सेमीफाइनल में मिली हार को कोई झटका मानने से इनकार कर दिया। विनेश 2024 पेरिस ओलंपिक के फाइनल से दिल तोड़ने वाले तरीके से बाहर होने के बाद पहली बार मुकाबले में हिस्सा ले रही थीं। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मां बनने के बाद फिर से बड़े मुकाबलों में वापसी करना है। उन्होंने कहा कि मां बनने के बाद और महीनों तक कानूनी और प्रशासनिक लड़ाइयां लड़ने के बाद मुकाबले में वापसी करना उन्हें एक जीत जैसा लगा। विनेश ने कहा, ‘मेरे बेटे के जन्म को अभी सिर्फ 10 महीने ही हुए हैं। मैं फिर से मैट पर खड़ी हूं और नई पीढ़ी के पहलवानों से मुकाबला कर रही हूं। मुझे खुद पर गर्व है। मुझे उम्मीद है कि मैं अपने बेटे और कई महिला पहलवानों के लिए प्रेरणा बन सकूंगी।’
उन्होंने ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को उन महिला पहलवानों के लिए एक ऐतिहासिक पल बताया जो मां बनने के बाद कुश्ती में वापसी करना चाहती हैं जिसने उन्हें ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत दी थी। उन्होंने कहा, ‘एक लड़की मां बनने के बाद फिर से मैट पर लौट रही है। अब रास्ता खुल गया है। आज नहीं तो कल, इसके लिए कोई न कोई नीति जरूर बनेगी। जो महिला पहलवान मां बनने के बाद वापसी करना चाहती हैं, उन्हें एक उचित मौका और कुछ छूट मिलनी चाहिए।’ इकतीस वर्षीय पहलवान ने आरोप लगाया कि अदालत के दखल के बाद भी, अधिकारियों ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी करना जारी रखा। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह अधिकारियों से उनकी करीब एक घंटे तक बहस हुई, जब उन्हें बताया गया कि 53 किग्रा वर्ग में हिस्सा लेने की उनकी इच्छा के बावजूद उन्हें केवल 50 किग्रा वर्ग में ही मुकाबला करने की अनुमति दी जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘जब मुझे अपनी ‘रिकवरी’ और तैयारी पर ध्यान देना चाहिए था, तब मैं अधिकारियों से बहस कर रही थी। उन्होंने मुझे एक पत्र दिया जिसमें कहा गया था कि मैं केवल 50 किग्रा वर्ग में ही मुकाबला कर सकती हूं। यह मानसिक उत्पीड़न था।’ विनेश ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए ही तैयार की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जान-बूझकर मजबूत पहलवानों को उनके ड्रॉ में रखा गया और मुकाबलों की समय-सारिणी इस तरह तय की गई कि सेमीफाइनल से पहले ही उनकी ऊर्जा खत्म हो गई। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘मुझे उचित मौका नहीं दिया गया। मेरी श्रेणी की सभी मजबूत लड़कियों को मेरे ड्रॉ में डाल दिया गया। मुकाबले इस तरह से निर्धारित किए गए थे जिससे मेरे ऊर्जा स्तर पर बुरा असर पड़ा।’
इन शिकायतों के बावजूद विनेश ने अपनी हार की जिम्मेदारी स्वीकार की और माना कि प्रतिस्पर्धी अनुभव और सहनशक्ति की कमी ने उनके प्रदर्शन को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी हार स्वीकार करती हूं। मैं और कड़ी मेहनत करुंगी और पहले से ज्यादा मजबूत होकर वापसी करूंगी। फिटनेस और सहनशक्ति की समस्याएं थीं, लेकिन उससे भी ज्यादा मुझे प्रतियोगिताओं की जरूरत थी। मैंने लगभग दो साल से किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया था। मां बनने के बाद यह मेरा पहला टूर्नामेंट था।’ उन्होंने कहा कि शनिवार के प्रदर्शन ने उन्हें यह विश्वास दिला दिया है कि उनमें अभी भी देश की सर्वश्रेष्ठ पहलवानों के साथ मुकाबला करने की पर्याप्त क्षमता है। विनेश ने कहा, ‘आज मैं काफी प्रेरित महसूस कर रही थी।
मुझे पता है कि मैं युवा लड़कियों को हरा सकती हूं। मुझमें अब भी वह हिम्मत और आत्मविश्वास बाकी है। अगर मैं कड़ी मेहनत करूंगी, तो मुझे पता है कि मैं और भी मजबूत होकर वापसी कर सकती हूं।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक अभी भी उनका लक्ष्य हैं, तो विनेश ने सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘बिल्कुल। मैं लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए ही मैट पर वापस आई हूं।’ पहलवान ने खेल प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि उनकी भागीदारी से जुड़े बार-बार के विवादों के बावजूद किसी भी संस्था ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘सरकार, खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ, कोई भी इस मामले में कोई पक्ष नहीं ले रहा है। यह बहुत दुख की बात है।
अगर खिलाड़ियों को व्यवस्था के बावजूद संघर्ष करके टिके रहना पड़ता है, तो कहीं न कहीं व्यवस्था में गंभीर खामी है।’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई युवा पहलवान निजी तौर पर उनका समर्थन करते थे, लेकिन वे प्रशासकों के खिलाफ खुलकर बोलने से डरते थे। उन्होंने कहा, ‘बहुत सी लड़कियां मुझे मैट पर वापस देखकर खुश थीं। वे आकर मुझसे बात करती हैं, लेकिन वे डरी हुई हैं। वे जानती हैं कि अगर उन्होंने ताकतवर लोगों के खिलाफ आवाज़ उठाई तो क्या हो सकता है।’ हालांकि विनेश ने साफ किया कि उन्हें साथी पहलवानों से कोई शिकायत नहीं है और कहा कि खेल के भीतर की बड़ी समस्याओं के लिए एथलीटों को दोष नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘इन बच्चों की कोई गलती नहीं है। मुझे किसी भी एथलीट से कोई नाराजगी नहीं है। समस्या तो उन लोगों से हैं जो व्यवस्था में हेरफेर करके उस पर नियंत्रण रखते हैं।’