

मियामी गार्डंस : आखिरी तिलिस्म तोड़ने से चूकी फ्रांस और इंग्लैंड की टीमें FIFA वर्ल्ड कप के उस मैच में आमने सामने होंगे जो दोनों ही खेलना नहीं चाहती होंगी। फ्रांस को वर्ल्ड कप का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था। वहीं इंग्लैंड भी 1966 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप जीतने के करीब पहुंचता दिख रहा था। लेकिन सेमीफाइनल में ही इनके सफर पर विराम लग गया। फाइनल अर्जेंटीना और स्पेन के बीच होगा जबकि कीलियन एमबाप्पे की फ्रांस और हैरी केन की इंग्लैंड तीसरे स्थान के लिये खेलेंगी।
फ्रांस के डिफेंडर इब्राहिमा कोनाटे ने कहा, ‘हम में से कोई तीसरे स्थान का मैच खेलना नहीं चाहता था। लेकिन अब हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। देखते हैं कि क्या होता है।’ अर्जेंटीना के खिलाफ सेमीफाइनल में रणनीतिक चूक के लिये आलोचना झेल रहे इंग्लैंड के कोच थॉमस ट्यूशेल को भी इससे अपने बचाव का मौका मिलेगा। उन्होंने शुक्रवार को कहा था, ‘कोई भी यह मैच नहीं खेलना चाहता था। सभी चारों टीमें न्यूयॉर्क में फाइनल खेलना चाहती थी।
लेकिन यह विश्व कप का आधिकारिक मैच है। इंग्लैंड के पास छह दशक में पहली बार खिताब जीतने का मौका था। मानसिकता कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप अपनी मर्जी से चालू और बंद कर सकते हैं। यह दिखाने का पल है कि हम क्या कर सकते हैं जो हमने पूरे टूर्नामेंट में दिखाया।’ फ्रांस के स्टार एमबाप्पे के पास भी गोल्डन बूट जीतने का यह आखिरी मौका है जो टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी को दिया जाता है।
एमबाप्पे और अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी के आठ गोल हैं। मेसी ने चार गोल में सहायता की जबकि एमबाप्पे ने तीन में। इंग्लैंड के हैरी केन और जूड बेलिंगहम के छह छह गोल हैं। फ्रांस के कोच दिदियेर देसचैम्प्स ने कहा कि एमबाप्पे शनिवार के मैच के लिये उपलब्ध हैं लेकिन वह नियमित लाइनअप में बदलाव करेंगे।