

नयी दिल्ली : पिछले साल चोट के कारण एशिया कप के लिये रवानगी से ठीक पहले टीम से बाहर हुईं दीपिका को पता नहीं था कि अब मैदान पर कब लौट सकेंगी। FIH नेशंस कप में मिली खिताबी जीत में सबसे ज्यादा छह गोल करके भारतीय महिला हॉकी की इस स्टार ड्रैग फ्लिकर ने लय और आत्मविश्वास दोनों हासिल कर लिये। न्यूजीलैंड में FIH नेशंस कप जीतकर भारतीय महिला हॉकी टीम ने प्रो लीग में वापसी की है जिससे पिछले सत्र में वह बाहर हो गई थीं। पूरी तरह फिट होकर लौटी दीपिका ने इस टूर्नामेंट में अमेरिका की एशले सेसा के साथ सर्वाधिक छह गोल दागे।
दीपिका ने इंटरव्यू में कहा, ‘मैने पूरी तरह फिट होकर वापसी नेशंस कप में ही की है। काफी समय बाद इस स्तर पर खेला है तो शुरू में थोड़ी नर्वस थी कि कैसे कर पाऊंगी। अच्छा टूर्नामेंट रहा और चोट के बाद वापसी के बाद इस प्रदर्शन से आत्मविश्वास बढ़ा है।’ पिछले साल अगस्त में एशिया कप के लिये रवानगी से एक दिन पहले आखिरी अभ्यास सत्र में पैर फिसलने से उन्हें ग्रेड तीन हैमस्ट्रिंग टियर (घुटने के पीछे की मांसपेशी में चोट) हो गया था। दीपिका अप्रैल में चार मैचों के अर्जेंटीना दौरे पर भारतीय टीम में थी लेकिन रिहैबिलिटेशन में होने के कारण ज्यादा नहीं खेली।
इससे पहले मार्च में हैदराबाद में विश्व कप क्वालीफायर भी वह नहीं खेल सकी थी। जनवरी में वह एचआईएल में चैंपियन एसजी पाइपर्स टीम का हिस्सा थीं लेकिन पूरी तरह वापसी नहीं थी। वर्ष 2025 में हॉकी इंडिया के सर्वश्रेष्ठ उदीयमान खिलाड़ी का पुरस्कार जीतने वाली दीपिका ने कहा, ‘हॉकी से दूर रहने का समय मेरे लिये बहुत कठिन था। मुझे गुस्सा आता था और मैं रोती थी कि टीम से बाहर क्यो हूं। अर्जेंटीना और आॅस्ट्रेलिया दौरे पर भी रिहैब में थी और नेशंस कप से ही सही मायने में वापसी हुई है।’
उन्होंने वापसी का श्रेय कोच शोर्ड मारिन, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच वेन लोम्बार्ड और ट्रेनर को दिया। बाईस वर्ष की इस खिलाड़ी ने कहा, ‘पिछले साल ऐसी चोट लगी थी कि वापसी के बारे में पता ही नहीं था। लेकिन अगर मैं फॉर्म में वापसी कर सकी और खेल सकी हूं तो इसका श्रेय कोच शोर्ड, वेन, ट्रेनर कियारा और रोडेट को जाता है जिन्होंने अच्छा रिहैब कराया और काफी मेहनत की है।’ हरियाणा की इस स्ट्राइकर ने कहा, ‘कोच शोर्ड ने आने के बाद कम समय में टीम को खड़ा किया है जो आसान नहीं था।
उन्होंने बहुत मेहनत की है और खिलाड़ियों ने पूरा साथ दिया है। कोचिंग स्टाफ की जितनी तारीफ करें, कम है।’ उन्होंने ड्रैग फ्लिक के लिये नीदरलैंड के ताइके ताकेमा के साथ विशेष शिविर को भी श्रेय देते हुए कहा कि विरोधी टीमों के वीडियो विश्लेषण से उन्हें काफी मदद मिली। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकरों में गिने जाने वाले ताकेमा मई में आॅस्ट्रेलिया दौरे पर और नेशंस कप में भी टीम के साथ थे। दीपिका ने कहा, ‘उनके साथ ड्रैग फ्लिक शिविर का अनुभव काफी अच्छा रहा। हमने न सिर्फ ड्रैग फ्लिक पर काम किया बल्कि दूसरी टीमों के वीडियो भी देखे कि उनके पहले रशर कैसे आ रहे हैं या गोलकीपर का मूवमेंट क्या है। इससे मुझे काफी मदद मिली है कि कहां शॉट मारना है।’