अर्जेंटीना ने राष्ट्रीय टीम के अंतिम मैच में मेसी को विदाई दी

मेसी (39 वर्ष) ने मंगलवार को अर्जेंटीना की जर्सी में अपना आखिरी मैच खेला और दो दशक से अधिक लंबे शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर को भावुक विदाई दी। जिस खिलाड़ी ने अर्जेंटीना के फुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, उसके जाने के साथ टीम एक ऐसे युग के अंत की गवाह बनी, जिसे हमेशा याद किया जाएगा।
अर्जेंटीना ने राष्ट्रीय टीम के अंतिम मैच में मेसी को विदाई दी
Published on: 

ब्यूनस आयर्स : अर्जेंटीना एक ऐसी वास्तविकता का सामना कर रहा है जिसकी कल्पना करना भी कभी मुश्किल था कि राष्ट्रीय टीम में महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी नहीं होंगे। मेसी की विदाई सिर्फ एक महान खिलाड़ी के संन्यास की कहानी नहीं, बल्कि अर्जेंटीना के फुटबॉल के एक स्वर्णिम अध्याय के खत्म होने का भी अहसास है। मेसी (39 वर्ष) ने मंगलवार को अर्जेंटीना की जर्सी में अपना आखिरी मैच खेला और दो दशक से अधिक लंबे शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर को भावुक विदाई दी। जिस खिलाड़ी ने अर्जेंटीना के फुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, उसके जाने के साथ टीम एक ऐसे युग के अंत की गवाह बनी, जिसे हमेशा याद किया जाएगा। मेसी ने 21 वर्षों तक खेलते हुए 126 गोल दागे, दो कोपा अमेरिका खिताब और एक विश्व कप के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कहा।

उन्होंने विदाई मैच में बेनिन पर मिली 3-0 की जीत में पेनल्टी पर गोल किया और अन्य दो गोल करने में मदद की। पश्चिम अफ्रीकी देश के खिलाफ एक साधारण मैत्री मैच उस क्षण में बदल गया जिसका इस फुटबॉल के दीवाने देश को लंबे समय से डर था। वैलेंटिनो रूसो मैच देखने के लिए ब्यूनस आयर्स में एक दोस्त के घर जा रहा था। उसने कहा, ‘ऐसा लगता है कि एक युग समाप्त हो रहा है, यह जानते हुए कि वह अब राष्ट्रीय टीम के लिए नहीं खेलेगें। मैं दुखी हूं। मुझे लगता है कि आज हर कोई परेशान है। उसकी कमी खलेगी।’ अर्जेंटीना के लोगों का उस शर्मीले लड़के के साथ गहरा रिश्ता रहा, जो 13 साल की उम्र में अपने गृहनगर रोसारियो को छोड़कर स्पेनिश क्लब बार्सिलोना की युवा अकादमी में चला गया था।

जैसे-जैसे वह वैश्विक ‘आइकॉन’ के रूप में विकसित हुआ, उसके देशवासियों ने उसे प्यार भी किया और बुरा-भला भी कहा, कभी-कभी अपने देश के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए और उस देश के प्रति उदासीनता का आरोप लगाते हुए। लेकिन जब तक उसने अपने शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत किया, अर्जेंटीना के प्रति उसकी निष्ठा पर अब कोई सवाल नहीं था। शिकागो विश्वविद्यालय के शिक्षाविद आंद्रेस राबिनोविच ने अर्जेंटीना की संस्कृति में फुटबॉल की भूमिका पर शोध किया है। उन्होंने कहा, ‘अर्जेंटीना के लोग अक्सर कहते हैं, भगवान का शुक्र है कि मेरा जन्म ऐसे समय में हुआ जब मैं मेसी को खेलते हुए देखने का चमत्कार अनुभव कर सका। अर्जेंटीना में रहना कठिन है। फुटबॉल अक्सर उन कुछ चीजों में से एक है जो आपको थोड़ी राहत, थोड़ी खुशी देती है।’

वर्षों से, अर्जेंटीना के लोग इस बात पर बहस करते रहे थे कि मेसी को विश्व मंच से कब और कैसे विदा होना चाहिए। 31 अगस्त को उनकी यह घोषणा कि वह राष्ट्रीय टीम से संन्यास ले रहे हैं। अर्जेंटीना के विश्व कप फाइनल में स्पेन से हारने के कुछ सप्ताह बाद यह घोषणा कृतज्ञता और शोक की बाढ़ ले आई, भले ही मेसी इंटर मियामी के साथ मेजर लीग सॉकर में चमकते रहेंगे। उनके साथी रोड्रिगो डी पॉल ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘मुझे नहीं पता कि कभी किसी खिलाड़ी और उसके राष्ट्र के बीच इससे बड़ी प्रेम कहानी रही है या नहीं, जैसी प्रेम कहानी आपने अर्जेंटीना के साथ मिलकर रची है।’ अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ ने मंगलवार के मैच (मेस्सी का 208वां) को राष्ट्रीय विदाई में बदल दिया जिसे ‘द लास्ट टैंगो’ कहा गया। ब्यूनस आयर्स के सबसे बड़े स्टेडियम के 85,000 से अधिक टिकट 90 मिनट में बिक गए।

शुरुआत में करीब 60 से 300 डॉलर कीमत वाले इन टिकटों की दोबारा बिक्री वाली वेबसाइटों पर कीमत 2,500 डॉलर से भी अधिक पहुंच गई। अर्जेंटीना की 1978, 1986 और 2022 की विश्व कप विजेता टीमों के खिलाड़ी उन्हें विदाई देने के लिए लौटे। मैच खत्म होने के बाद मेसी की आंखें नम हो गईं, जब उनके साथी उनके चारों ओर इकट्ठा होकर तालियां बजाने लगे। ‘ओले, ओले, ओले, ओले, मेसी, मेसी’ का गूंजता हुआ स्वर स्टैंड से उठा जबकि हजारों प्रशंसक उछलते हुए गा रहे थे और उनकी ओर ऐसे झुके मानो उनकी पूजा कर रहे हों। मिडफील्ड में एक बैनर ने उन्हें ‘इटरनल’ (शाश्वत) कप्तान घोषित किया। मेसी ने कहा, ‘सच तो यह है कि मैं जितना कभी बोला हूं, उससे ज्यादा बोल रहा हूं। मैं यहां से नहीं जाना चाहता, मैं इस मैदान को नहीं छोड़ना चाहता।

मैं बस आपसे कहना चाहता हूं कि मैं आपसे प्यार करता हूं, मुझे आपकी कमी खलेगी और मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मैं अर्जेंटीना का हूं।’ मेसी ने 2000 और 2010 के दशकों के दौरान अपने क्लब के साथ ट्रॉफियां जीतीं और बार्सिलोना से लेकर बांग्लादेश तक प्रशंसक बनाए। फिर भी अपने देश के लिए एक बड़ा खिताब उनसे दूर रहा। जहां दुनिया ने एक अलौकिक प्रतिभा देखी, वहीं अपने देश में कुछ लोगों ने एक ऐसे बाहरी व्यक्ति को देखा जिसने अर्जेंटीना में कभी पेशेवर रूप से नहीं खेला था और जो उनकी उम्मीदों के बोझ तले दबता हुआ लगता था। अर्जेंटीना की भीड़ अर्जेंटीना की 1986 विश्व कप जीत के महानायक डिएगो माराडोना को याद करते हुए ‘डिएगो, डिएगो’ के नारे लगाती थी और मेसी को उस मानक की याद दिलाते थे जिसे वह अभी तक हासिल नहीं कर पाए थे।

मेसी का शांत व्यक्तित्व माराडोना से बिल्कुल विपरीत था जो उनकी देशभक्ति को लेकर संदेह को और बढ़ाता था। 2016 में अर्जेंटीना के लगातार तीसरे फाइनल में हारने के बाद, मेसी ने कुछ समय के लिए राष्ट्रीय टीम छोड़ दी। निर्णायक मोड़ 2021 में आया, जब अर्जेंटीना ने ब्राजील को हराकर दक्षिण अमेरिका की चैंपियनशिप कोपा अमेरिका जीती और 28 वर्षों में पहली बार यह खिताब हासिल किया। मेसी मैदान पर गिर पड़े जबकि उनके साथी खिलाड़ी दौड़कर उन्हें गले लगाने आए। जिस खिलाड़ी पर लंबे समय से बहुत कम भावनाएं दिखाने का आरोप लगता रहा था, वह सिसकियां रोक नहीं पा रहा था। अगले साल कतर में विश्व कप की जीत ने एक राष्ट्रीय नायक के रूप में उनकी जगह पक्की कर दी।

मेसी ने वह एकमात्र पुरस्कार दिला दिया जो उनसे दूर रहा था और लाखों अर्जेंटीनी सामूहिक उल्लास में सड़कों पर उमड़ पड़े, उनके नारों में उनका नाम और उनकी पीठ पर उनका नंबर 10 था। पिछले कुछ हफ्तों से अर्जेंटीना के अखबार मेसी की यादों और उनकी उपलब्धियों को समर्पित भावुक लेखों से भरे रहे हैं। वहीं, देशभर में मेसी के सम्मान में बनाए गए भित्तिचित्र (म्यूरल) भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। अर्जेंटीना के प्रमुख दैनिक ‘ला नासियोन’ ने एक डॉक्यूमेंट्री ‘इम्मॉर्टल’ जारी की और उनके करियर को समर्पित 196 पन्नों का विशेष संस्करण प्रकाशित किया। जून से विश्व कप ट्रॉफी के साथ घुटने टेककर बैठे मेसी की 26 मीटर (85 फुट) ऊंची प्रतिमा पैटागोनिया में खड़ी हुई है। मंगलवार को ब्यूनस आयर्स का मशहूर ओबेलिस्क स्मारक राष्ट्रीय ध्वज के रंगों आसमानी और सफेद रोशनी से जगमगा उठा। वहीं, समाचार वेबसाइटों ने बेनिन के खिलाफ दोस्ताना मुकाबले के हर मिनट की लाइव कवरेज की मानो यह विश्व कप का फाइनल मुकाबला हो।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in