सिक्किम दार्जिंलिंग की कोई संभावना नहीं’: प्रेम सिंह तामांग ने सिक्किम की क्षेत्रीय अखंडता पर जताया दृढ़ रुख

सिक्किम दार्जिंलिंग की कोई संभावना नहीं’: प्रेम सिंह तामांग ने सिक्किम की क्षेत्रीय अखंडता पर जताया दृढ़ रुख
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गंगटोक, 25 सितंबर: सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग ने गुरुवार को सिक्किम के दार्जिलिंग पहाड़ियों के साथ किसी भी प्रकार के विलय की संभावना को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और विशिष्ट पहचान की पूरी तरह रक्षा करेगी।

गंगटोक में नेवार समुदाय द्वारा आयोजित इंद्र जात्रा समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिक्किम के विलय की कोई संभावना नहीं है और किसी भी अलग राज्य की व्यवस्था के लिए सिक्किम अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं देगा।

उन्होंने कहा, “विलय की कोई संभावना नहीं है। हम अपने रुख पर कायम हैं। अलग राज्य बनाने के लिए हम एक इंच जमीन भी नहीं जाने देंगे। हम सिक्किम की विशिष्ट पहचान को उसी रूप में संरक्षित रखेंगे।”

मुख्यमंत्री का यह बयान दार्जिलिंग पहाड़ियों की लंबे समय से चली आ रही अलग राज्य की मांग को लेकर प्रस्तावित राजनीतिक रोडमैप पर सिक्किम में जारी बहस के बीच आया है। इससे पहले प्रसारित एक प्रारंभिक चर्चा दस्तावेज में अलग उत्तर बंगाल राज्य और पड़ोसी राज्यों के कुछ सटे हुए क्षेत्रों को शामिल करने के संभावित विकल्प का उल्लेख किया गया था। इस पर सिक्किम में क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। हालांकि, प्रोफेसर महेंद्र पी. लामा ने बाद में स्पष्ट किया था कि उस मसौदे में सिक्किम को शामिल करने का प्रस्ताव नहीं था और विवादित विकल्प केंद्र को सौंपे गए अंतिम दस्तावेज का हिस्सा नहीं था।

तामांग ने कहा कि कथित विलय के मुद्दे को लेकर पैदा हुए विवाद ने सिक्किम और दार्जिलिंग पहाड़ियों के लोगों के बीच संबंधों पर अनावश्यक दबाव पैदा किया है। उन्होंने ऐसी कथित प्रचार गतिविधियों से बचने की अपील की, जो दोनों क्षेत्रों के बीच मौजूदा सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि सिक्किम और दार्जिलिंग पहाड़ियों के लोगों के बीच सामाजिक सौहार्द तथा अच्छे संबंधों को बनाए रखना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने इस विवाद को सिक्किम की 12 वंचित स्वदेशी समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग से भी जोड़ा। उनके अनुसार, इस तरह की बातें फैलाने वालों का अपना राजनीतिक एजेंडा है और वे 12 समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने के राज्य के प्रयासों में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं।

राज्य सरकार पिछले कई वर्षों से इस मुद्दे पर काम कर रही है। प्रोफेसर बी.वी. शर्मा की अध्यक्षता और प्रोफेसर महेंद्र पी. लामा की उपाध्यक्षता में गठित सिक्किम राज्य उच्चस्तरीय समिति ने 12 समुदायों पर मानवशास्त्रीय और नृजातीय रिपोर्ट तैयार की है। इन रिपोर्टों को अप्रैल 2025 में राज्य सरकार को सौंपा गया था।

मुख्यमंत्री ने अपने मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रोफेसर महेंद्र पी. लामा का बचाव करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 12 समुदायों को जनजातीय मान्यता दिलाने के प्रयास के तहत मानवशास्त्रीय और नृजातीय रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा के बाद अगले महीने राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।

तामांग ने यह भी बताया कि सरकार वर्तमान में विभिन्न दीर्घकालिक दृष्टि दस्तावेजों पर काम कर रही है, जिसमें सिक्किम विजन @2047 भी शामिल है। प्रोफेसर महेंद्र पी. लामा मुख्यमंत्री के एमेरिटस एवं मुख्य आर्थिक सलाहकार के साथ-साथ विजन दस्तावेज तैयार करने वाली कार्यकारी समिति के अध्यक्ष हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य ध्यान विकास, सामाजिक सौहार्द तथा सिक्किम की विशिष्ट संवैधानिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा पर केंद्रित है।

मुख्यमंत्री इससे पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि सिक्किम की संवैधानिक पहचान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371एफ के तहत संरक्षित है और राज्य का दार्जिलिंग के साथ किसी भी प्रकार का विलय स्वीकार्य नहीं है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब दार्जिलिंग में अलग राज्य की मांग और सिक्किम तथा पड़ोसी पश्चिम बंगाल के नेपाली भाषी समुदायों के बीच जनजातीय दर्जे की मांग सार्वजनिक विमर्श में एक-दूसरे से जुड़ती दिखाई दे रही है। सिक्किम सरकार ने जनजातीय दर्जे की मांग को लेकर पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त चर्चाओं में भी भाग लिया है, जबकि यह स्पष्ट किया है कि उसकी उच्चस्तरीय समिति विशेष रूप से सिक्किम के 12 वंचित समुदायों के मुद्दे पर काम कर रही है।

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