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बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की वापसी की तैयारी

वन मंत्री मनोज कुमार उरांव, मंत्री विशाल लामा, सांसद मनोज टिग्गा व अन्य
वन मंत्री मनोज कुमार उरांव, मंत्री विशाल लामा, सांसद मनोज टिग्गा व अन्य
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अलीपुरदुआर: उत्तर बंगाल के बहुचर्चित बक्सा टाइगर रिजर्व में वर्षों बाद बाघों की वापसी सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आगामी 2 अक्टूबर को बक्सा जंगल में एक मादा बाघ लाने की तैयारी अंतिम चरण में है। इसको लेकर सोमवार को अलीपुरदुआर जिले के राजाभातखावा स्थित एनआईसी सभागार में उच्चस्तरीय प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के वन मंत्री मनोज कुमार उरांव, राज्य प्रतिमंत्री विशाल लामा, अलीपुरदुआर के सांसद मनोज टिग्गा, जिलाधिकारी मयूरी बसु, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार साव तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में बाघ को सुरक्षित रूप से बक्सा लाने, उसे एनक्लोजर में रखकर अनुकूलन प्रक्रिया से गुजरने और बाद में जंगल में छोड़ने की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। इस दौरान परियोजना पर आधारित एक प्रस्तुति भी अधिकारियों के समक्ष रखी गई। वन विभाग के अनुसार, बाघ को पहले विशेष रूप से तैयार किए गए एनक्लोजर में रखा जाएगा, जहां उसकी गतिविधियों और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाएगी। पूरी तरह अनुकूल होने के बाद उसे प्राकृतिक जंगल में छोड़ा जाएगा।

परियोजना से जैव विविधता और इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद

वन मंत्री मनोज कुमार उरांव ने बताया कि बक्सा के 25 माइल क्षेत्र में बन रहे एनक्लोजर का निरीक्षण किया गया है और निर्माण कार्य संतोषजनक पाया गया है। उन्होंने कहा कि इस चरण में एक मादा बाघ को लाने की योजना है, जिसके लिए बिहार या असम के मानस क्षेत्र से बाघ स्थानांतरित किए जाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की स्थायी आबादी विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिक परियोजना है। इसके लिए न केवल बाघों को लाना आवश्यक है, बल्कि उनके लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार करना भी जरूरी है। इसके तहत आधुनिक निगरानी व्यवस्था और विशेषज्ञ टीम की तैनाती की जा रही है। वन मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के तहत जयंती गांव के निवासियों का चरणबद्ध पुनर्वास किया जाएगा। उन्हें वनछाया बस्ती में स्थानांतरित कर सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज दिया जाएगा। इससे पहले गांगुटिया और गुटिया वन बस्तियों का सफल पुनर्वास किया जा चुका है। वन विभाग का मानना है कि इस परियोजना से बक्सा टाइगर रिजर्व में जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा तथा डुआर्स क्षेत्र में इको-टूरिज्म को नई पहचान मिलेगी। यदि यह योजना सफल होती है, तो बक्सा एक बार फिर देश के प्रमुख बाघ आवासों में शामिल हो सकेगा।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की नजर अब 2 अक्टूबर पर टिकी है, जब वर्षों बाद बक्सा के जंगल में बाघ की दहाड़ सुनाई देने की उम्मीद की जा रही है।

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