

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी से पहाड़ देखने निकले हैं तो नजर जरा संभालकर उठाइए। सामने कंचनजंघा दिखे या न दिखे, बड़े-बड़े विज्ञापन हॉर्डिंग जरूर नजर आ जाएंगे। शहर की सड़कों और हाइवे के किनारे खड़े विशाल हॉर्डिंग अब कई जगह पहाड़ों के खूबसूरत नजारे के बीच दीवार बनते दिखाई दे रहे हैं। यानी प्रकृति ने कंचनजंघा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन शहर ने उसके आगे विज्ञापन टांगने में कोई कसर नहीं छोड़ी।साफ मौसम में सिलीगुड़ी से दिखाई देने वाला हिमालय पर्यटकों और शहरवासियों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र है। यही दृश्य उत्तर बंगाल की पर्यटन पहचान को भी खास बनाता है। मगर प्रमुख सड़कों और मोड़ों पर लगाए गए बड़े हॉर्डिंग धीरे-धीरे इस पहचान को ढक रहे हैं। सवाल यह है कि जिस पहाड़ को देखने के लिए पर्यटक कैमरा निकालते हैं, उसे क्या विज्ञापन के लिए नजरों से ही गायब कर दिया जाए?दुनिया के कई पर्यटन क्षेत्रों में प्राकृतिक दृश्यों को बचाने के लिए विज्ञापनों के आकार, स्थान और दृश्यता पर नियंत्रण रखा जाता है। स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, जापान और भूटान जैसे क्षेत्रों में प्राकृतिक सौंदर्य को पर्यटन की संपत्ति मानकर उसके आसपास विज्ञापन व्यवस्था को नियंत्रित करने के उदाहरण मिलते हैं। वहां प्रकृति खुद आकर्षण है, उसके सामने विज्ञापन खड़ा करने की जरूरत नहीं।सिलीगुड़ी में भी अब तय करने का वक्त है कि शहर की पहचान कंचनजंघा होगी या उसके सामने खड़े हॉर्डिंग। विज्ञापन जरूरी हैं, लेकिन अगर विज्ञापन इतना बड़ा हो जाए कि पहाड़ ही छोटा नजर आने लगे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन को हॉर्डिंग के लिए ऐसी नीति पर विचार करना चाहिए, जिससे कारोबार भी चले और सिलीगुड़ी का पहाड़ी नजारा भी बचा रहे।