त्रिबेणी राई की फिल्म ‘ए क्रॉनिकल ऑफ माइनर थिंग्स’ ने जीते एपीएम बुसान और सोरफोंड पुरस्कार, नॉर्वे का मिला निमंत्रण

त्रिबेणी राई की फिल्म ‘ए क्रॉनिकल ऑफ माइनर थिंग्स’ ने जीते एपीएम बुसान और सोरफोंड पुरस्कार, नॉर्वे का मिला निमंत्रण
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गंगटोक : फिल्मकार त्रिबेणी राई की आगामी फीचर फिल्म ‘ए क्रॉनिकल ऑफ माइनर थिंग्स’ ने दक्षिण कोरिया में आयोजित एशियन प्रोजेक्ट मार्केट (एपीएम) में एपीएम बुसान पुरस्कार और सोरफोंड पुरस्कार जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही त्रिबेणी राई को सोरफोंड पुरस्कार के तहत नॉर्वे आमंत्रित किया गया है, जिससे उनके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और फिल्म निर्माण के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

यह परियोजना बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के साथ आयोजित एशियन प्रोजेक्ट मार्केट में 48 देशों से प्राप्त रिकॉर्ड 604 प्रविष्टियों में से चुनी गई। राई और निर्माता किसले ने इस मंच पर अपनी फिल्म परियोजना प्रस्तुत की, जो अंतरराष्ट्रीय निर्माताओं, निवेशकों, बिक्री प्रतिनिधियों और सह-निर्माण साझेदारों को जोड़ने वाले एशिया के प्रमुख मंचों में से एक है।

दो प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित होना राई की दूसरी फीचर फिल्म के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे परियोजना के लिए अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण और वित्तपोषण की संभावनाओं को बल मिलने की उम्मीद है। फिल्म फिलहाल विकास के शुरुआती चरण में है।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए त्रिबेणी राई ने कहा कि परियोजना का विकास अभी शुरू ही हुआ है और ये पुरस्कार उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि वे सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने इस सम्मान के लिए खुशी व्यक्त करते हुए आभार जताया।

एशियन प्रोजेक्ट मार्केट फिल्मकारों को अंतरराष्ट्रीय फिल्म उद्योग के समक्ष अपनी परियोजनाएं प्रस्तुत करने, सहयोग के अवसर तलाशने और वित्तपोषण की संभावनाएं विकसित करने का मंच प्रदान करता है। एपीएम बुसान पुरस्कार इस मंच पर प्रस्तुत संभावनाशील फिल्म परियोजनाओं को सम्मानित करता है, जबकि सोरफोंड पुरस्कार नॉर्वे में सहयोग और निर्माण के अवसरों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय फिल्म परियोजनाओं को समर्थन देता है।

त्रिबेणी राई की यह उपलब्धि सिक्किम और व्यापक हिमालयी क्षेत्र के फिल्म जगत के लिए भी उत्साहजनक है, क्योंकि इससे क्षेत्र की फिल्म निर्माण प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने की संभावनाएं मजबूत होती हैं।

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